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बिहार में कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा’: लोकतंत्र की रक्षा का नया आंदोलन


बिहार की सियासत में इन दिनों एक नई हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के साथ मिलकर ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की है। यह यात्रा बिहार के सासाराम से आरंभ हुई और अगले 16 दिनों में राज्य के 20 जिलों से होकर गुज़रेगी, जिसकी कुल दूरी लगभग 1,300 किलोमीटर होगी। यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना में होगा।

यात्रा का उद्देश्य

कांग्रेस और राजद का यह अभियान चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के खिलाफ विरोध स्वरूप शुरू किया गया है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली और “वोट चोरी” की कोशिश हो रही है। इसी को लेकर यह यात्रा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और लोगों को जागरूक करने के मकसद से निकाली गई है।

नेताओं की एकजुटता

इस यात्रा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, कन्हैया कुमार समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राजद सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी इस मौके पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा पर करारा प्रहार किया। उन्होंने भाजपा को “चोरों की पार्टी” बताते हुए कहा कि यह जनता के वोट चुराकर लोकतंत्र को कमजोर करने का काम कर रही है। लालू ने अपील की—
“चोरों को हटाइए, बीजेपी को भगाइए और हमें जिताइए।”

विपक्ष का आह्वान

लालू यादव ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर अपने बेटे तेजस्वी यादव तक सभी विपक्षी नेताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया। उनका कहना था कि लोकतंत्र बचाने और भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्ष को किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना चाहिए।

भाजपा का पलटवार

दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस की इस ‘वोटर अधिकार यात्रा’ को “संविधान बदनाम यात्रा” करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह विपक्ष का सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है, जो जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

निष्कर्ष

बिहार की राजनीति हमेशा से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही है। अब राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यह संयुक्त यात्रा आने वाले चुनावों से पहले विपक्ष की ताकत को मज़बूती देने की कोशिश है। यह यात्रा वास्तव में विपक्ष की एकजुटता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जंग के रूप में देखी जा रही है। हालांकि जनता के मन में यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या यह प्रयास भाजपा के मजबूत किले को हिला पाएगा या केवल राजनीतिक शोर तक सीमित रह जाएगा।


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