
19 अगस्त 2025 को संसद में जब भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर विशेष विमर्श हुआ, तो सियासी बहस ने नया रंग ले लिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—
“लगता है सरकार अब सितारों से पूछकर ही तय करेगी कि बिहार में SIR पर बहस कब करानी है।”
🚀 विज्ञान की ऊँचाई और राजनीति की नोकझोंक
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजे जाने की घोषणा पर यादव ने बधाई दी। उन्होंने माना कि यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता और वैश्विक साझेदारी का प्रतीक है।
लेकिन साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद अंतरिक्ष की ऊँचाइयों की बात कर रही है, तो क्या वह ज़मीन पर उठ रहे सवालों से आँखें मूंद रही है?
📜 बिहार का SIR विवाद
बिहार में चल रहा स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) यानी विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम मतदाता सूची से जुड़ा है। विपक्ष का आरोप है कि इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी है और राजनीतिक दबाव हावी है।
अखिलेश यादव का कहना है कि सरकार इस पर खुली बहस से बच रही है और ध्यान भटकाने के लिए अंतरिक्ष उपलब्धियों को आगे कर रही है।
💼 अमेरिकी टैरिफ और स्थानीय व्यापारी
यादव ने संसद में उत्तर प्रदेश के व्यापारियों की परेशानियों का भी ज़िक्र किया। अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च आयात शुल्क (टैरिफ़) का असर विशेष रूप से “एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)” योजना के तहत काम करने वाले छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।
उनका सवाल था—जब वैश्विक नीतियाँ सीधे भारतीय कारीगरों और उद्यमियों को प्रभावित कर रही हैं, तब सरकार क्यों चुप्पी साधे है?
🗣️ व्यंग्य के पीछे लोकतांत्रिक संदेश
अखिलेश यादव की टिप्पणी भले ही व्यंग्यात्मक थी, लेकिन इसके पीछे गंभीर प्रश्न छिपे हैं—
- क्या संसद जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है?
- क्या अंतरिक्ष की चर्चाओं की आड़ में ज़मीनी समस्याएँ दबाई जा रही हैं?
- क्या सरकार जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है?
✍️ निष्कर्ष
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि विज्ञान, राजनीति और व्यापार जैसे क्षेत्र आपस में गहराई से जुड़े हैं। अंतरिक्ष की उड़ान जितनी प्रेरणादायक है, उतना ही ज़रूरी है कि लोकतंत्र ज़मीन पर उठ रहे सवालों का जवाब भी दे।