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जमीन के बदले नौकरी मामला: राबड़ी देवी के वकील की दलील – “पैसे देकर जमीन खरीदना अपराध नहीं”


नई दिल्ली, 19 अगस्त 2025 – दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू अदालत में मंगलवार को बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से सुनवाई हुई। इस दौरान उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने अदालत को बताया कि राबड़ी देवी ने जमीन खरीदी और उसके बदले भुगतान किया। यह पूरी तरह एक कानूनी लेन-देन था और इसे अपराध नहीं माना जा सकता।

अदालत में पेश हुई दलीलें

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष सुनवाई में वकील ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है और पैसे देता है तो यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता। यहाँ न तो किसी उम्मीदवार को नौकरी का विशेष लाभ दिया गया और न ही किसी प्रकार की सिफारिश की गई।

सीबीआई का आरोप है कि जमीन को नौकरी के बदले लिया गया था। हालांकि, वकील मनींदर सिंह ने तर्क दिया कि गवाहों के बयानों के अनुसार जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह से पैसों के आधार पर हुई थी। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 13 लाख रुपये का भुगतान चेक से किया गया था, जो लेन-देन की पारदर्शिता दर्शाता है।

सीबीआई के आरोप पर सवाल

वकील ने सीबीआई से सवाल किया कि यदि यह सच है कि नौकरियां जमीन के बदले दी गईं, तो सभी नियुक्तियाँ क्यों रद्द नहीं की गईं? उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई यह साबित करने में असफल रही है कि भ्रष्टाचार हुआ। “जहाँ 950 आवेदन हुए, उनमें से केवल 30 आवेदन सीधे जीएम के पास जमा हुए। ऐसे में भ्रष्टाचार कहाँ है?” – उन्होंने अदालत में प्रश्न उठाया।

बचाव पक्ष का तर्क

अधिवक्ता ने आगे कहा कि जमीन खरीदने का अर्थ यह नहीं है कि किसी पर कोई अहसान किया गया। “लालू जी ने किसी पर कोई कृपा नहीं की, न ही किसी की व्यक्तिगत मदद की। यह कहना कि ‘जमीन दो और नौकरी लो’ पूरी तरह गलत है।”

उनके अनुसार, खरीदी गई जमीन सामान्य बाजार दर से कम दाम पर हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भ्रष्टाचार हुआ। हर खरीद-बिक्री का मूल्य अलग-अलग हो सकता है और इसे अपराध नहीं ठहराया जा सकता।

निष्कर्ष

राबड़ी देवी के वकील का यह स्पष्ट तर्क है कि जमीन खरीदने और नौकरी देने के आरोप दो अलग-अलग घटनाएँ हैं और इनमें कोई संबंध नहीं है। अदालत अब इस मामले में आगे की सुनवाई बुधवार को करेगी।


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