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🎮 ऑनलाइन गेमिंग उद्योग का संकट: नए विधेयक पर उठे सवाल


नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025:
भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग एक बड़े मोड़ पर खड़ा है। केंद्र सरकार द्वारा “ऑनलाइन गेमिंग (प्रोत्साहन एवं विनियमन) विधेयक 2025” लाने की तैयारी के बीच, उद्योग संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की है। इन संस्थाओं का कहना है कि यदि सरकार सभी वास्तविक धन आधारित खेलों (Real Money Games) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है, तो यह करोड़ों युवाओं के रोजगार और उद्यमिता पर गंभीर असर डालेगा।

यह विधेयक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा संसद में पेश किया जाना है। इसका उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को एक राष्ट्रीय ढांचे के तहत नियंत्रित करना है, साथ ही उन मनी गेम्स को रोकना है जो अलग-अलग राज्यों या विदेशी न्यायक्षेत्रों से संचालित होते हैं।

🤝 संयुक्त प्रतिनिधित्व
ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF), ई-गेमिंग फेडरेशन (EGF) और फेडरेशन ऑफ इंडिया फैंटेसी स्पोर्ट्स (FIFS) ने मिलकर सरकार को ज्ञापन सौंपा है। इन संगठनों का दावा है कि वे देश के लगभग पूरे ऑनलाइन स्किल-गेमिंग सेक्टर का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके अनुसार, यह उद्योग प्रधानमंत्री के 1 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विज़न का अहम हिस्सा है।

इन संगठनों ने कहा—
“यदि सभी वास्तविक धन आधारित खेलों पर एक समान प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह एक वैध और रोजगार सृजन करने वाले उद्योग को समाप्त कर देगा। इससे न केवल लाखों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ेगा बल्कि भारतीय उपयोगकर्ताओं और नागरिकों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा।”

📊 आर्थिक महत्व
वर्तमान में भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग—

तेज़ी से बढ़ रहे इस सेक्टर की सालाना वृद्धि दर (CAGR) लगभग 20% है और अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इसका आकार दोगुना हो जाएगा।

⚖️ निष्कर्ष
ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के प्रतिनिधियों का स्पष्ट मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध की जगह संतुलित और पारदर्शी विनियमन की आवश्यकता है। यदि सरकार उद्योग के विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को साथ लेकर चलती है, तो यह क्षेत्र न केवल रोजगार बल्कि कर राजस्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत को नई पहचान दिला सकता है।


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