
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025:
दिल्ली की एक अदालत की महिला कर्मचारी, जो कुछ समय पहले एक कथित आपत्तिजनक वीडियो के मामले में विवादों में आई थीं, अब सभी आरोपों से मुक्त हो गई हैं। विभागीय जांच में यह पाया गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
जांच की प्रक्रिया और निष्कर्ष
तिस हजारी कोर्ट के जिला जज को इस मामले की जांच की ज़िम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने सभी गवाहों और दस्तावेजों की गहन पड़ताल करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि:
- महिला स्टाफर पर लगाए गए अनुशासनहीनता और अनैतिक आचरण के आरोप निराधार साबित हुए।
- कार्यालय समय में उनके किसी भी तरह के गलत व्यवहार का प्रमाण सामने नहीं आया।
- वायरल वीडियो के संबंध में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उनकी संलिप्तता सिद्ध नहीं हो सकी।
क्या कहा रिपोर्ट में
जांच अधिकारी ने साफ तौर पर उल्लेख किया कि विभागीय कार्रवाई के लिए आवश्यक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन पर लगाए गए आरोपों को आगे बढ़ाना न्यायोचित नहीं होगा।
नतीजा
इस रिपोर्ट के आधार पर महिला स्टाफर को बरी कर दिया गया है। यह फैसला उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है और यह भी दर्शाता है कि बिना ठोस सबूत किसी भी कर्मचारी के भविष्य और प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता।