
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार तेज़ होता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के नेता आपसी वफादारी तक नहीं निभा पा रहे हैं। उनके मुताबिक, भाजपा के विधायक और कार्यकर्ता आपस में ही एक-दूसरे के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया कि भाजपा के कई विधायक अब वसूली एजेंट बन चुके हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को अपना हिस्सा न मिले, तो जिन लोगों पर 25 लाख रुपये की उगाही के आरोप हैं, उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता। यह संकेत उन्होंने सुल्तानपुर के एक भाजपा विधायक से जुड़े मामले की ओर किया।
🔎 भाजपा के भ्रष्टाचार का “जाल”
अखिलेश यादव ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह मामला केवल सुल्तानपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में भाजपा के भ्रष्टाचार की जड़ें फैली हुई हैं। उनके अनुसार, हर ठेकेदार जब ऐसे हालात में काम करेगा, तो काम की गुणवत्ता स्वतः प्रभावित होगी।
इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा—
- सड़कें धंस जाएंगी
- पुल और टैंक ढह जाएंगे
- छतें टपकेंगी
- और सबसे बड़ी बात, लोगों की ज़िंदगियाँ खतरे में पड़ेंगी।
⚖️ “खाता इधर भी है, उधर भी”
अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा कि भाजपा में हर नेता और कारोबारी का आपस में साझा “खाता” चलता है, लेकिन जब हिस्सेदारी की बात आती है, तो कोई किसी से बांटना नहीं चाहता। यही कारण है कि भाजपा नेताओं के बीच ही अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
🚩 “भाजपा जाएगी तो विकास आएगा”
अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने साफ कहा कि भाजपा सत्ता में रहते हुए केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। अगर भाजपा सत्ता से बाहर जाएगी, तभी असली प्रगति और विकास संभव होगा।
✨ निष्कर्ष
अखिलेश यादव का यह बयान केवल भाजपा की आलोचना नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश और देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का आईना भी दिखाता है। जनता के लिए यह संदेश साफ है कि भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की राजनीति से बचकर ही वास्तविक विकास की राह खोली जा सकती है।