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बिहार से उठी आवाज़, अब पूरा देश रोकेगा “चुनावी चोरी”: राहुल गांधी


नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025:
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान कहा कि जिस तरह बिहार में लोग चुनावी गड़बड़ियों और “इलेक्शन चोरी” का डटकर विरोध कर रहे हैं, उसी तरह पूरा देश भी इस प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं करेगा।

राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “लोगों का उत्साह बहुत अच्छा है। अब हर कोई कह रहा है कि बिहार में वोट चोरी हो रही है। यह सच्चाई है और बिहार इसका विरोध कर रहा है। आने वाले दिनों में पूरा देश भी चुनावी चोरी के खिलाफ आवाज़ उठाएगा।”

‘वोटर अधिकार यात्रा’ और उसका उद्देश्य

यह यात्रा 16 दिनों तक चलेगी, जिसकी शुरुआत 17 अगस्त को बिहार के सासाराम से हुई। यात्रा का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में की गई कथित अनियमितताओं और “वोट चोरी” के खिलाफ लोगों को जागरूक करना है। यह यात्रा 1,300 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करेगी, 20 से ज्यादा जिलों से गुज़रेगी और 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी।

राहुल गांधी के साथ इस यात्रा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता dipankar भट्टाचार्य भी शामिल हुए। 19 अगस्त को यह कारवां औरंगाबाद होते हुए नवादा पहुंचा।

राजनीतिक बयानबाज़ी तेज

जहां राहुल गांधी इस यात्रा को “जनता की आवाज़” बता रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस नेता पर “झूठ की दुकान” चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी देशभर में गलत सूचनाएं फैला रहे हैं।

भाटिया ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी देश से उन “झूठों” के लिए माफी मांगेंगे, जो वह बिहार की जनता के बीच फैला रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में कथित “बोगस वोटिंग” संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने साफ कहा था कि आरोप साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं।

आने वाले दिनों में बढ़ेगी टकराहट

विश्लेषकों का मानना है कि बिहार से शुरू हुई यह राजनीतिक मुहिम आने वाले महीनों में पूरे देश की राजनीति को प्रभावित कर सकती है। राहुल गांधी का दावा है कि जनता लोकतंत्र बचाने के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है, वहीं भाजपा इसे केवल चुनावी स्टंट बता रही है।

अब देखना यह होगा कि 1 सितंबर को पटना में इस यात्रा के समापन तक जनता का रुख किस ओर झुकता है और क्या वाकई यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर “चुनावी चोरी” के खिलाफ बड़ी लड़ाई का रूप ले पाता है।


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