
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच हाल ही में हुई चर्चा ने वैश्विक राजनीति और द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा दी है। मैक्रॉन ने अपने ट्वीट के माध्यम से इस बातचीत की मुख्य झलक साझा की, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि दोनों देश केवल आपसी सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी साझा भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
यूक्रेन संकट और शांति की पहल
चर्चा का सबसे अहम पहलू यूक्रेन युद्ध रहा। मैक्रॉन ने कहा कि बहुपक्षीय सहयोग (Multilateralism) ही न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। इस वार्ता में यूक्रेन और यूरोप के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया। इससे यह साबित होता है कि फ्रांस और ब्राज़ील भले ही अलग-अलग महाद्वीपों में हों, लेकिन वैश्विक शांति बहाल करने में समान रूप से गंभीर हैं।
जलवायु परिवर्तन और COP30 की तैयारी
पर्यावरणीय संकट पर भी गहन विमर्श हुआ। मैक्रॉन ने बताया कि 2025 में बेलेम (ब्राज़ील) में होने वाले COP30 सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण बनाया। अमेज़न वर्षावन की वजह से ब्राज़ील पर्यावरणीय बहस का केंद्रीय देश है, और फ्रांस का सहयोग इस दिशा में वैश्विक प्रयासों को गति दे सकता है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
वार्ता के दौरान आर्थिक मुद्दे भी प्रमुख रहे। फ्रांस ने यूरोपीय संघ और मर्कोसुर (Mercosur) के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर रुचि जताई। हालांकि, मैक्रॉन ने स्पष्ट किया कि यह समझौता तभी स्वीकार्य होगा जब यह फ्रांसीसी व यूरोपीय कृषि और उद्योगों के हितों की रक्षा करेगा। यह रुख बताता है कि फ्रांस संतुलित व्यापार की वकालत करता है, जहाँ सभी पक्षों को समान लाभ मिले।
रक्षा, परिवहन और भविष्य की योजनाएँ
दोनों नेताओं ने सीमा शुल्क नीतियों, रक्षा सहयोग और परिवहन के क्षेत्रों में नई संभावनाओं पर भी चर्चा की। साथ ही, जून 2025 में राष्ट्रपति लूला की फ्रांस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों की मज़बूती का अहम पड़ाव माना गया।
निष्कर्ष
इस बातचीत से स्पष्ट है कि फ्रांस और ब्राज़ील अपनी साझेदारी को बहुआयामी रूप दे रहे हैं। चाहे वह शांति स्थापना का प्रयास हो, जलवायु परिवर्तन से निपटना हो या व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देना – दोनों देश एक साझा दृष्टि के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह साझेदारी आने वाले वर्षों में न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होगी, बल्कि वैश्विक संतुलन और स्थिरता की दिशा में भी अहम योगदान देगी।