
मॉस्को, 21 अगस्त
अमेरिका द्वारा रूसी आयात पर 50% टैरिफ लगाने के ताज़ा फैसले के बीच, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रूस की कंपनियों को भारतीय बाज़ार के साथ और गहराई से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था, “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों और बुनियादी ढाँचे के विस्तार ने विदेशी निवेशकों के लिए अपार संभावनाएँ पैदा की हैं।
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा,
“भारत आज 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था है और लगभग 7% की दर से लगातार विकास कर रहा है। आने वाले वर्षों में हमें विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं से बड़ी मात्रा में संसाधनों की आवश्यकता होगी। उर्वरक, रसायन और मशीनरी जैसी वस्तुओं की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने आगे बताया कि भारत का तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण और आधुनिकीकरण न केवल उपभोग और जीवनशैली में बदलाव ला रहा है, बल्कि व्यापारिक अवसरों का भी विस्तार कर रहा है।
“विदेशी व्यवसायों के लिए भारत में नए रास्ते खुले हैं। यह रूसी कंपनियों के लिए अपने भारतीय साझेदारों के साथ और अधिक नज़दीकी से जुड़ने का उचित समय है,” जयशंकर ने कहा।
विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और रूस के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से स्थिर और मज़बूत रहे हैं। फिर भी, उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग उतना व्यापक नहीं हो पाया, जितना होना चाहिए था।
उन्होंने कहा,
“हमारे द्विपक्षीय संबंध राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में से एक रहे हैं। लेकिन व्यापार की दृष्टि से हमारी साझेदारी सीमित दायरे तक ही सिमटी रही है और इसमें व्यापार असंतुलन भी काफी अधिक है। अब समय आ गया है कि हम व्यापार को संतुलित और विविधतापूर्ण बनाएं।”
जयशंकर ने रूसी कंपनियों को भारत में निवेश और सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी को केवल ऊर्जा या रक्षा क्षेत्र तक सीमित न रखकर, नए क्षेत्रों में भी विस्तार करना आवश्यक है।