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द्वितीय विश्व युद्ध : मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी


नई दिल्ली: बीसवीं शताब्दी का सबसे भयंकर और विश्वव्यापी संघर्ष, द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945), न केवल देशों के बीच शक्ति की होड़ था, बल्कि इसने पूरी मानवता की दिशा बदल दी। यह युद्ध लाखों सैनिकों और करोड़ों नागरिकों की मौत का कारण बना तथा दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को पूरी तरह नया रूप दे गया।


युद्ध की पृष्ठभूमि

प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1919 में हुई वर्साय संधि ने जर्मनी को सैन्य और आर्थिक दृष्टि से बेहद कमजोर बना दिया। देश पर भारी मुआवज़ा और प्रतिबंधों ने जनता के भीतर गहरी असंतोष की भावना पैदा की। इसी असंतोष की पृष्ठभूमि में एडोल्फ हिटलर और उसकी नाज़ी पार्टी ने उग्र राष्ट्रवाद, आर्य श्रेष्ठता और क्षेत्रीय विस्तार की विचारधारा के सहारे सत्ता हासिल की।


संघर्ष की शुरुआत

1 सितंबर 1939 को जब जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण किया, तो ब्रिटेन और फ्रांस ने तत्काल जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। यहीं से एक ऐसा संघर्ष शुरू हुआ जो धीरे-धीरे यूरोप, एशिया, अफ्रीका और प्रशांत महासागर तक फैल गया।


युद्ध के प्रमुख मोर्चे


युद्ध का अंत और परिणाम

1945 में सोवियत संघ ने बर्लिन पर कब्जा कर लिया और हिटलर ने आत्महत्या कर ली। इसी वर्ष अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए, जिसके बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया।

इस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ, लेकिन इसके प्रभाव दशकों तक पूरी दुनिया में महसूस किए गए।


निष्कर्ष

द्वितीय विश्व युद्ध केवल एक सैन्य टकराव नहीं था, बल्कि यह ऐसा मोड़ था जिसने मानव इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया। इसने हमें शांति, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय समझदारी की अनिवार्यता का सबसे बड़ा सबक दिया।


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