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विविधता और सहअस्तित्व : एक सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता


नई दिल्ली, 23 अगस्त:
आज भी दुनिया के कई हिस्सों में लोग केवल अपने धर्म या विश्वास के कारण उत्पीड़न, हिंसा और यहां तक कि हत्या का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि मानव सभ्यता के लिए गहरी चिंता का विषय भी है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने हाल ही में अपने संदेश में इस गंभीर मुद्दे पर चेताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि हमें एक सुरक्षित और सम्मानजनक समाज बनाना है तो इस चुनौती का सामना सीधे करना होगा। उनके अनुसार, विविधता को मनाने और सभी समुदायों को गरिमा व सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार देना ही स्थायी शांति की कुंजी है।

धार्मिक और वैचारिक भिन्नताओं के आधार पर हो रही नफरत और हिंसा मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यह केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे समाज में विभाजन और अविश्वास को जन्म देती है। इसलिए आवश्यक है कि सरकारें, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करें जहाँ हर व्यक्ति अपने विश्वास के साथ सुरक्षित महसूस कर सके।

आज की वैश्विक दुनिया में सहिष्णुता और परस्पर सम्मान की भावना पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गई है। जब हम विविधता को कमजोरी की बजाय ताकत मानेंगे, तभी एक ऐसा भविष्य संभव होगा जिसमें हर व्यक्ति समान अधिकार, स्वतंत्रता और सुरक्षा का अनुभव कर सकेगा।


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