
भारत ने एक और बार यह साबित कर दिया है कि वह रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार है। 23 अगस्त 2025 को ओडिशा तट के पास इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) का पहला सफल परीक्षण किया गया। यह परीक्षण दोपहर लगभग 12:30 बजे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया।
🔹 IADWS क्या है?
IADWS यानी Integrated Air Defence Weapon System एक बहु-स्तरीय (multi-layered) वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे DRDO ने स्वदेशी तकनीक के आधार पर तैयार किया है। इसमें कई आधुनिक हथियार और सुरक्षा तंत्र शामिल हैं, जैसे:
- क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM): दुश्मन के हवाई हमले या ड्रोन जैसे खतरों को तुरंत नष्ट करने की क्षमता।
- एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS): निकट दूरी के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करने वाला तंत्र।
- डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW): उच्च शक्ति वाले लेज़र आधारित हथियार, जो भविष्य की युद्ध प्रणाली का अहम हिस्सा हैं।
🔹 क्यों है यह प्रणाली महत्वपूर्ण?
- मल्टी-लेयर सुरक्षा कवच: IADWS विभिन्न स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे किसी भी प्रकार का हवाई हमला—चाहे मिसाइल हो, ड्रोन हो या लड़ाकू विमान—को रोकना संभव है।
- पूरी तरह स्वदेशी तकनीक: यह प्रणाली “मेक इन इंडिया” पहल को और मज़बूती देती है, जिससे भारत पर बाहरी देशों की निर्भरता कम होगी।
- भविष्य की जंग के लिए तैयार: लेज़र आधारित हथियार और तेज़ प्रतिक्रिया वाली मिसाइलें आने वाले समय की रक्षा रणनीति में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।
🔹 वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्व
आज जब दुनिया में हवाई खतरों का स्वरूप बदल रहा है—ड्रोन, स्टेल्थ विमान और मिसाइलें आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं—ऐसे समय में IADWS भारत को रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगा। यह सिर्फ़ सीमाओं की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता को भी दर्शाता है।
✨ निष्कर्ष
IADWS का सफल परीक्षण भारत की रक्षा शक्ति में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है। यह न सिर्फ़ देश की सुरक्षा को मजबूत बनाएगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि भारत रक्षा तकनीक में किसी भी बड़े देश से पीछे नहीं है। आने वाले समय में यह प्रणाली भारतीय वायुसेना और थलसेना की रीढ़ बनकर सीमाओं की रक्षा करेगी।