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ग़ाज़ा अस्पताल हादसा: इज़राइल ने जताया गहरा अफसोस


तेल अवीव/ग़ाज़ा, 26 अगस्त 2025
ग़ाज़ा के नास्सर अस्पताल पर हुए हमले में हुई भारी तबाही के बाद इज़राइल ने गहरा खेद व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह एक “दुर्भाग्यपूर्ण हादसा” था और इज़राइल पत्रकारों, डॉक्टरों और आम नागरिकों की सुरक्षा को महत्व देता है।

सोमवार को हुए इस हमले में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें पाँच पत्रकार, कई स्वास्थ्यकर्मी और राहतकर्मी शामिल थे। बताया जा रहा है कि यह हमला “डबल-टैप” तकनीक से किया गया था, जिसमें पहले अस्पताल की ऊपरी मंजिल को निशाना बनाया गया और कुछ ही मिनटों बाद दूसरा प्रहार तब किया गया जब पत्रकार और बचावकर्मी सीढ़ियों से होकर ऊपर की ओर भागे।

मारे गए पत्रकारों में बड़े नाम शामिल

हमले में अल जज़ीरा के मोहम्मद सलामा, रॉयटर्स के कैमरामैन हुस्साम अल-मस्री और फ्रीलांस पत्रकार मरियम अबू दक्का (जो उस समय एपी के लिए कार्यरत थीं) की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और भय का माहौल पैदा कर दिया।

अल जज़ीरा के संवाददाता तारिक अबू अज़्ज़ूम ने बताया कि यह हमला न केवल अस्पताल में मौजूद मरीजों और स्टाफ के लिए घातक साबित हुआ, बल्कि आसपास के लोगों को भी गहरे सदमे और दहशत में डाल गया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और निंदा

नास्सर अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. अहमद अल-फर्रा ने इसे “स्पष्ट रूप से सोचा-समझा हमला” करार दिया। अल जज़ीरा ने भी इसे “सच दबाने की कोशिश” बताते हुए कड़ी निंदा की। वहीं, फिलिस्तीनी पत्रकार संघ ने कहा कि यह हमला स्वतंत्र पत्रकारिता को कुचलने और दुनिया के सामने ग़ाज़ा की सच्चाई आने से रोकने की साजिश है।

संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा, “हर दिन ग़ाज़ा में निर्दोष लोग और मददगार मारे जा रहे हैं। अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कदम उठाए। नाकाबंदी समाप्त होनी चाहिए, हथियारों पर प्रतिबंध लगे और इज़राइल पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं।”

लगातार बढ़ रही तबाही

ग़ाज़ा में इज़राइली हमलों से स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। केवल सोमवार को ही 61 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें सात लोग मदद मांगने वालों में शामिल थे। ग़ाज़ा की सिविल डिफेंस के अनुसार, 6 अगस्त से अब तक इज़राइल ने ग़ाज़ा सिटी में लगभग 1,000 इमारतों को ध्वस्त कर दिया है।


👉 यह घटना ग़ाज़ा में मानवीय संकट की गंभीरता को और उजागर करती है। अस्पताल और पत्रकारिता संस्थान जैसे संरक्षित स्थलों पर हमले न केवल युद्ध अपराध के दायरे में आते हैं, बल्कि इंसानियत के लिए भी गहरी चोट साबित होते हैं।


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