
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में राज्य की महत्वाकांक्षी ‘सबुज साथी योजना’ के ग्यारहवें चरण की शुरुआत की। इस अनोखी पहल के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निःशुल्क साइकिलें दी जा रही हैं, ताकि वे शिक्षा के सफर को और सरल व सुगम बना सकें।
ताज़ा चरण की झलक
नया चरण पुरबा बर्दवान ज़िले से आरंभ हुआ। इस बार लगभग 12.5 लाख छात्र-छात्राओं को, जो वर्ष 2025 में कक्षा 9 में पढ़ेंगे, साइकिलें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए राज्य सरकार ने लगभग 525 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। शुभारंभ दिवस पर ही पूरे प्रदेश में 50,000 से अधिक साइकिलें बाँटी गईं और शेष साइकिलें जल्द ही योग्य विद्यार्थियों तक पहुँचाई जाएँगी।
अब तक की उपलब्धियाँ
यह योजना वर्ष 2015-16 में लागू की गई थी। इसके बाद से लगातार दस चरण पूरे हो चुके हैं और इस दौरान 1.38 करोड़ से अधिक साइकिलें छात्रों तक पहुँचाई गईं। इस पहल ने ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा की राह आसान की है, क्योंकि अब बच्चों को स्कूल आने-जाने में लंबी दूरी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
योजना का महत्व
- गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को स्कूल तक पहुँचने में सुविधा मिलती है।
- शिक्षा का स्तर और विद्यालय में उपस्थिति दर बढ़ी है।
- यह योजना बालिकाओं के लिए विशेष रूप से सहायक साबित हुई है, क्योंकि अब उन्हें सुरक्षित व स्वतंत्र रूप से विद्यालय जाने का साधन उपलब्ध है।
निष्कर्ष
‘सबुज साथी’ केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने का प्रयास है। ममता बनर्जी सरकार का यह कदम उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जहाँ आर्थिक कठिनाइयों के कारण बच्चे पढ़ाई से दूर हो जाते थे। निःशुल्क साइकिलें विद्यार्थियों के लिए न केवल परिवहन का साधन हैं, बल्कि उनके सपनों की रफ्तार भी हैं।