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🌍 अफ्रीका: हरित ऊर्जा का नया क्षितिज और निवेश की चुनौती


अफ्रीका महाद्वीप प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से दुनिया का सबसे समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। यहां सूरज की रोशनी सालभर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती है, हवाओं की गति स्थिर और शक्तिशाली है तथा खनिज भंडारों की विविधता इसे अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए असाधारण अवसर प्रदान करती है। इसके बावजूद, वैश्विक निवेश में अफ्रीका की हिस्सेदारी बेहद कम है। यह केवल आर्थिक असंतुलन नहीं, बल्कि वैश्विक न्याय और जलवायु प्रतिबद्धताओं पर गंभीर प्रश्न भी खड़ा करता है।


🔋 अफ्रीका की ऊर्जा क्षमता


💰 निवेश की कमी: असमानता क्यों?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हाल ही में स्पष्ट किया कि अक्षय ऊर्जा में होने वाले वैश्विक निवेश का अफ्रीका को केवल बहुत छोटा अंश मिलता है। यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि—

इस प्रकार, अफ्रीका की उपेक्षा केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक असमानता का द्योतक है।


🔧 समाधान की दिशा

  1. वित्तीय सहायता: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को अफ्रीका की अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  2. तकनीकी सहयोग: विकसित देशों को अपनी उन्नत हरित प्रौद्योगिकियों को साझा कर अफ्रीका की परियोजनाओं में मदद करनी होगी।
  3. स्थानीय भागीदारी: निवेश योजनाओं में स्थानीय समुदायों को शामिल करना अनिवार्य है, ताकि उनका प्रत्यक्ष लाभ आम जनता तक पहुंचे।
  4. नीतिगत सुधार: अफ्रीकी देशों को भी पारदर्शिता और निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा।

🌱 निष्कर्ष

अफ्रीका ऊर्जा उत्पादन का भविष्य तय करने की क्षमता रखता है। यदि उसे समान अवसर और पर्याप्त संसाधन मिलें, तो वह केवल अपनी जनता की ज़रूरतें पूरी नहीं करेगा बल्कि विश्व को भी हरित ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है। असली जलवायु न्याय तभी संभव है जब अफ्रीका को उसका उचित हिस्सा और सहयोग दिया जाए।


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