
26 अगस्त, अमेरिका के इतिहास में दर्द से भरी एक तारीख है। चार साल पहले काबुल एयरपोर्ट के एबी गेट पर हुए आत्मघाती विस्फोट ने 13 अमेरिकी सैनिकों की जान ले ली थी। यह हमला उस समय हुआ, जब अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सैन्य वापसी को अंतिम रूप दे रहा था। यह त्रासदी आज भी गोल्ड स्टार परिवारों के दिलों पर एक गहरी चोट के रूप में दर्ज है।
🇺🇸 शहादत की स्मृति और परिवारों का दुख
गोल्ड स्टार परिवार, जिनके प्रियजनों ने देश की सेवा में प्राण न्यौछावर किए, हर साल इस दिन अपने नायकों को याद करते हैं। इस बरसी पर श्रद्धांजलि के साथ-साथ राजनीति का रंग भी दिखाई दिया। अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पर शहीदों को नमन करते हुए यह आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासन गोल्ड स्टार परिवारों को न्याय दिलाने में असफल रहा।
⚖️ न्याय की मांग और प्रशासन पर सवाल
रुबियो का कहना था कि पिछली सरकार न्याय की दिशा में ठोस कदम नहीं उठा सकी, जबकि ट्रंप प्रशासन ने आईएसआईएस-के के उस आतंकी को पकड़ने और प्रत्यर्पित करने में तत्परता दिखाई था, जो इस हमले का जिम्मेदार था। इस बयान में श्रद्धांजलि के साथ-साथ नेतृत्व की तुलना और जवाबदेही की राजनीति भी साफ झलक रही थी।
🗣️ राष्ट्रपति का संदेश और संवेदनशीलता
वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रपति ने भी गोल्ड स्टार परिवारों के प्रति समर्थन और एकजुटता प्रकट की। उनका वक्तव्य शहीदों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक था, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे केवल सहानुभूति नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा गया।
🌍 अफगानिस्तान और वैश्विक सुरक्षा की चुनौती
एबी गेट पर हुआ हमला केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी था। अमेरिकी वापसी के बाद अफगानिस्तान अस्थिरता के दौर में चला गया और आईएसआईएस-के जैसे आतंकी संगठनों की गतिविधियाँ तेज़ हो गईं। इसने यह प्रश्न भी खड़ा किया कि क्या अमेरिका ने वापसी की प्रक्रिया में सुरक्षा पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान दिया था?
✍️ निष्कर्ष
एबी गेट पर हुए बलिदान केवल एक त्रासदी की याद नहीं, बल्कि अमेरिकी विदेश नीति, आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रतीक बन गए हैं। नेताओं के शब्द अब महज़ श्रद्धांजलि नहीं होते—वे नीति, न्याय और भविष्य की दिशा तय करने वाले संकेत भी होते हैं।