
अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फेडरल रिज़र्व की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की कोशिश ने आर्थिक जगत में हलचल मचा दी है। इस कदम पर अमेरिकी कांग्रेस की वरिष्ठ सदस्य नैंसी पेलोसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
फेडरल रिज़र्व की भूमिका
फेडरल रिज़र्व अमेरिका का केंद्रीय बैंक है, जो देश की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) को नियंत्रित करता है। इसका मुख्य कार्य डॉलर की स्थिरता बनाए रखना, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है – स्वतंत्रता (Independence)। किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर फैसले लेना फेडरल रिज़र्व की विश्वसनीयता का आधार है।
ट्रंप का विवादित प्रयास
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने गवर्नर लिसा कुक को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। इस कदम को विशेषज्ञ फेडरल रिज़र्व की स्वतंत्रता पर सीधा हमला मान रहे हैं। अगर सरकारें अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को हटाने लगें, तो न केवल संस्था की गरिमा गिरती है बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी नकारात्मक संदेश जाता है।
नैंसी पेलोसी की प्रतिक्रिया
नैंसी पेलोसी ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम हर अमेरिकी की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। उनके अनुसार, डॉलर की स्थिरता पर आँच आने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है और महंगाई के साथ-साथ बेरोज़गारी जैसी समस्याएँ गहराई तक असर डाल सकती हैं।
संभावित परिणाम
- डॉलर पर असर – अगर फेडरल रिज़र्व की स्वतंत्रता कमजोर होती है तो निवेशकों का भरोसा हिल सकता है।
- महंगाई का खतरा – राजनीतिक दबाव में लिए गए मौद्रिक फैसले महंगाई को और बढ़ा सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अनिश्चितता – दुनिया भर में डॉलर एक प्रमुख मुद्रा है। इसकी अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर सवाल – केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती का प्रतीक है। इसे कमजोर करना संस्थाओं में जनता का भरोसा कम कर सकता है।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह प्रयास केवल एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। फेडरल रिज़र्व जैसे संस्थानों की स्वतंत्रता बनाए रखना हर लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। नैंसी पेलोसी का बयान इसीलिए चेतावनी है कि अगर आर्थिक संस्थाओं को राजनीतिक खेल का हिस्सा बनाया गया, तो उसका खामियाज़ा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।