
आर्मी वॉर कॉलेज, महू में आयोजित रण संवाद 2025 में देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए आने वाले समय की युद्धक रणनीतियों और चुनौतियों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। इस अवसर पर उन्होंने तकनीकी प्रगति, सैन्य संयुक्तता (Jointness) और भविष्य के युद्ध के स्वरूप को लेकर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
🔹 तकनीक का बढ़ता प्रभाव
रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्धक क्षेत्र में तकनीक की भूमिका दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन सिस्टम, साइबर युद्ध और स्पेस टेक्नोलॉजी आने वाले दशकों में निर्णायक साबित होंगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनना होगा ताकि देश की सुरक्षा किसी भी तरह से बाहरी तकनीक पर निर्भर न रहे।
🔹 संयुक्तता (Jointness) की आवश्यकता
अपने संबोधन में श्री सिंह ने तीनों सेनाओं—थल, जल और वायु—के बीच एकीकृत संचालन की अनिवार्यता पर बल दिया। उनका मानना है कि भविष्य की लड़ाइयाँ केवल एक मोर्चे पर नहीं, बल्कि मल्टी-डोमेन बैटलफील्ड पर लड़ी जाएंगी, जहां सैन्य शाखाओं के बीच तालमेल ही विजय की कुंजी बनेगा।
🔹 भविष्य का युद्ध और भारत की तैयारी
रक्षा मंत्री ने संकेत दिया कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सूचना, तकनीक और मानसिक शक्ति पर भी आधारित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सेनाएँ इन चुनौतियों के लिए न केवल आधुनिक तकनीक अपना रही हैं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी निरंतर सुधार कर रही हैं।
🔹 आत्मनिर्भर भारत और सुरक्षा
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और अनुसंधान ही भारत को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
✍️ निष्कर्ष
रण संवाद 2025 केवल एक सैन्य सम्मेलन नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धक दर्शन को आकार देने का एक महत्वपूर्ण मंच है। रक्षा मंत्री के विचार यह दर्शाते हैं कि भारत आने वाले वर्षों में तकनीक, संयुक्तता और आत्मनिर्भरता को आधार बनाकर अपनी रक्षा नीति को और अधिक सशक्त बनाएगा।