
पेरिस: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ (EU) किसी भी देश की संप्रभुता को चुनौती नहीं देता और न ही किसी को धमकाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ की नीतियाँ शांति, सहयोग और आपसी सम्मान पर आधारित हैं, जबकि रूस की रणनीति लगातार आक्रामक और विस्तारवादी दिखाई देती है।
एक बयान में मैक्रों ने कहा—
“रूस के विपरीत, यूरोपीय संघ किसी को धमकाता नहीं है और प्रत्येक देश की संप्रभुता का सम्मान करता है।”
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद से यूरोप और रूस के संबंध बेहद बिगड़ चुके हैं और सूचना युद्ध (Information War) भी तेज़ हो गया है। मैक्रों ने विशेष रूप से क्रेमलिन की प्रोपेगेंडा मशीनरी की आलोचना की, जो पश्चिम के खिलाफ गलत सूचनाएँ फैलाने का काम करती है।
🔎 रूस-यूरोप टकराव की पृष्ठभूमि
- 2022 से शुरू हुए यूक्रेन युद्ध ने यूरोप और रूस के बीच संबंधों को गहराई से प्रभावित किया।
- यूरोपीय संघ ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए।
- वहीं, रूस पश्चिमी देशों पर “असुरक्षा और विस्तारवाद” का आरोप लगाता रहा है।
🌍 यूरोपीय संघ का संदेश
मैक्रों का यह बयान यूरोपीय संघ की उस नीति को रेखांकित करता है जिसमें वह खुद को लोकतंत्र, स्वतंत्रता और आपसी सहयोग का प्रतीक मानता है। उनके अनुसार, EU का मक़सद किसी की भूमि या सत्ता पर कब्ज़ा करना नहीं बल्कि साझेदारी और स्थिरता को बढ़ावा देना है।
✒️ निष्कर्ष
इमैनुएल मैक्रों का बयान यह साफ़ करता है कि यूरोप खुद को शांति का पैरोकार दिखाना चाहता है और रूस की “आक्रामक कूटनीति” से दूरी बनाना चाहता है। आने वाले दिनों में यह टकराव केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं बल्कि सूचना युद्ध और वैश्विक कूटनीति में भी गहराएगा।