
भारतीय परंपराओं में तुलसी का महत्व केवल औषधीय गुणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे देवी स्वरूप मानकर पूजा जाता है। विशेषकर उत्तर भारत और बंगाल में तुलसी पूजा एक ऐसी परंपरा है, जो आस्था, परिवारिक एकता और समाज में सद्भाव का जीवंत उदाहरण है।
✨ ममता बनर्जी का संदेश: परंपरा और समाज को जोड़ने वाला सूत्र
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तुलसी पूजा के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह परंपरा केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि समाज और परिवार को जोड़ने का माध्यम है। उनके अनुसार, आंगन में एक साथ बैठकर किया जाने वाला यह पूजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मज़बूत करता है और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ता है।
🌼 तुलसी पूजा का बहुआयामी महत्व
- धार्मिक दृष्टि से: तुलसी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक और भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाती है। देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन विशेष महत्व रखता है।
- पारिवारिक दृष्टि से: इस अवसर पर हर सदस्य की भागीदारी रिश्तों को गहराई देती है और आपसी सहयोग को बढ़ावा देती है।
- सांस्कृतिक दृष्टि से: यह परंपरा ग्रामीण और शहरी दोनों परिवेशों में भारतीय संस्कृति को जीवित रखने का कार्य करती है।
🌍 आधुनिक समाज में तुलसी पूजा की उपयोगिता
आज की व्यस्त और बदलती जीवनशैली में तुलसी पूजा हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है। यह परंपरा पर्यावरण-संरक्षण, मानसिक शांति और सामुदायिक एकता का संदेश देती है।
🕊️ एकता और सौहार्द का प्रतीक
ममता बनर्जी का संदेश केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है। तुलसी पूजा हमें यह याद दिलाती है कि हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त हैं। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ऐसा पर्व है जो पीढ़ियों को जोड़ता है और समाज को संगठित करता है।