
भारत में तेजी से बढ़ते कैंसर मामलों में स्तन कैंसर महिलाओं के लिए सबसे गंभीर खतरे के रूप में उभर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि समय पर जांच और सतर्कता ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।
एम्स, नई दिल्ली के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. निहार रंजन दाश का कहना है कि हर महिला को सप्ताह में कम से कम एक बार स्वयं स्तन की जांच करनी चाहिए। यह छोटा-सा कदम बड़ी बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ सकता है और इलाज को अधिक सफल बना सकता है।
🌸 क्यों ज़रूरी है नियमित स्वयं-जांच?
- भारत में महिलाओं में कैंसर के मामलों में सबसे अधिक हिस्सेदारी स्तन कैंसर की है।
- शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इलाज की सफलता दर 90% से भी अधिक हो सकती है।
- स्वयं-जांच बिल्कुल सरल, निःशुल्क और प्रभावी तरीका है, जो महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर नियंत्रण और आत्मविश्वास दोनों देता है।
🔎 स्वयं-जांच की आसान प्रक्रिया
- आईने के सामने निरीक्षण करें — स्तनों के आकार, रंग या त्वचा की बनावट में कोई बदलाव तो नहीं है।
- हाथों से महसूस करें — हल्के दबाव में गोलाकार गति से स्तनों को टटोलें। किसी गांठ, कठोरता या असामान्य संवेदना पर ध्यान दें।
- बगल और गर्दन के पास की जांच करें — क्योंकि कैंसर कोशिकाएं वहां भी फैल सकती हैं।
📲 डिजिटल अभियान और सामाजिक संदेश
स्वास्थ्य मंत्रालय इस मुहिम को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बढ़ावा दे रहा है।
#BreastCancerAwareness, #EarlyDetection और #SwasthyaKiBaat जैसे हैशटैग के ज़रिए यह संदेश देशभर की महिलाओं तक पहुँच रहा है। यह केवल एक स्वास्थ्य चेतावनी नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वास्थ्य-सजग बनाने का अभियान है।
🌍 ग्रामीण भारत: सबसे बड़ी चुनौती
शहरों में सोशल मीडिया और अस्पतालों के माध्यम से जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन गाँवों और कस्बों में अब भी संकोच और गलत धारणाएँ मौजूद हैं।
- यहाँ आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका अहम है।
- पंचायत स्तर पर सामूहिक जागरूकता अभियान और खुली चर्चाओं से इस सामाजिक झिझक को तोड़ा जा सकता है।
🙌 निष्कर्ष
स्तन कैंसर से लड़ाई केवल अस्पतालों या डॉक्टरों तक सीमित नहीं है—यह एक सामूहिक सामाजिक प्रयास है।
हर महिला को अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क होना होगा, हर परिवार को सहयोग करना होगा और हर समुदाय को जागरूकता फैलानी होगी।
👉 सिर्फ सप्ताह में पाँच मिनट की यह स्वयं-जांच, न जाने कितनी जिंदगियाँ बचा सकती है।