
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हाल ही में एक भयावह घटना का उल्लेख करते हुए दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। रूसी बैलिस्टिक मिसाइल ने एक आवासीय इमारत को निशाना बनाया, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में चार छोटे बच्चे भी शामिल थे—सबसे कम उम्र का बच्चा केवल तीन साल का था। यह हमला सिर्फ सैन्य टकराव नहीं था, बल्कि निर्दोष नागरिकों पर सीधा हमला और मानवता के खिलाफ अपराध था।
🕯️ शोक और राहत की पहल
घटना स्थल पर पहुँचकर राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवारों को सांत्वना दी। उन्होंने वादा किया कि विस्थापितों और पीड़ित परिवारों को शीघ्र ही सुरक्षित आवास और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास कार्यक्रम इस मानवीय प्रतिबद्धता का सजीव प्रमाण हैं।
⚔️ कूटनीति बनाम निर्दयता
ज़ेलेंस्की ने रूस की कार्रवाई को शांति प्रयासों का उपहास करार दिया। उनके शब्दों में—“जब पूरी दुनिया युद्ध समाप्त करने की राह खोज रही है, तब रूस बच्चों की जान लेकर अपने इरादे जता रहा है।” यह कथन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक सख्त चेतावनी था कि क्या अब भी चुप रहना नैतिक है?
🌍 वैश्विक एकजुटता की पुकार
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने उन देशों और नेताओं को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस हमले की निंदा की और सैन्य व आर्थिक सहयोग का आश्वासन दिया। उनका स्पष्ट संदेश था कि रूस केवल “बल की भाषा” समझता है, और उसी भाषा में उसे जवाब देना ज़रूरी है। यह केवल यूक्रेन की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र, सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा का साझा दायित्व है।
🧭 निष्कर्ष: इंसानियत की जीत ही अंतिम समाधान
यह त्रासदी हमें फिर याद दिलाती है कि युद्ध की सबसे बड़ी कीमत निर्दोष नागरिकों को चुकानी पड़ती है। बच्चों की मौत किसी भी भू-राजनीतिक रणनीति से परे मानवता की हार है। ज़ेलेंस्की की अपील केवल अपने देश के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए है—क्या हम मासूमों की चीख पर अब भी मौन रह सकते हैं?