
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हाल ही में कहा कि “आज के अस्थिर समय में यूरोप फिनलैंड पर भरोसा कर सकता है।” यह बयान केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि इस देश की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और उसकी विशेष सुरक्षा अवधारणा का प्रमाण है।
🔒 सीमा से परे सुरक्षा की परिभाषा
रूस के साथ लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करने वाला फिनलैंड वर्षों से यूरोपीय सुरक्षा तंत्र का अहम हिस्सा रहा है। लेकिन अब सुरक्षा का अर्थ केवल हथियार या सेना तक सीमित नहीं है। फिनलैंड ने इसे समाज की तैयारी, नागरिकों की भागीदारी और तकनीकी सजगता से जोड़कर और भी व्यापक बना दिया है।
🛡️ समाज-आधारित तैयारी का मॉडल
फिनलैंड ने “Whole-of-Society Preparedness” की नीति अपनाई है। इसके तहत स्कूलों, संस्थानों और आम नागरिकों को आपात स्थितियों—चाहे साइबर हमला हो, प्राकृतिक आपदा या सैन्य संकट—से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस मॉडल से सुरक्षा केवल सरकार का काम नहीं रह जाती, बल्कि हर नागरिक उसका सक्रिय हिस्सा बनता है।
🤝 नेतृत्व और साझेदारी
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब और प्रधानमंत्री पेटेरी ऑरपो का नेतृत्व यह दिखाता है कि देश घरेलू स्तर पर मजबूत होने के साथ-साथ यूरोपीय संघ में भी महत्वपूर्ण सहयोगी है। रक्षा, ऊर्जा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में उसकी भागीदारी यूरोप की सामूहिक ताकत को और मजबूती देती है।
🌍 संकटों के बीच स्थिरता का स्तंभ
यूक्रेन युद्ध, वैश्विक असुरक्षा और जलवायु संकट की पृष्ठभूमि में फिनलैंड ने यह साबित किया है कि स्थिरता केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक समाज और सशक्त सहयोग से संभव है। यही कारण है कि आज पूरा यूरोप फिनलैंड को एक विश्वसनीय सुरक्षा स्तंभ के रूप में देखता है।