
भारत के ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) आज न केवल रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम है, बल्कि यह ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
🔹 रिकॉर्ड बजटीय समर्थन और पारदर्शिता
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने मनरेगा के लिए अभूतपूर्व बजट प्रावधान किया है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। इससे यह योजना और अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनी है।
🔹 महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
मनरेगा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी। यह न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है बल्कि ग्रामीण समाज में लैंगिक समानता को भी बढ़ावा दे रहा है। महिलाएं अब खेतों, वृक्षारोपण और जल-संरक्षण जैसे कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
🔹 ग्रामीण बुनियादी ढांचा और संसाधन प्रबंधन
मनरेगा के अंतर्गत किए जा रहे कार्य जैसे तालाब निर्माण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और सड़क निर्माण न सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराते हैं बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाते हैं। इन प्रयासों से जल संसाधनों का संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरणीय संतुलन में सुधार होता है।
🔹 समावेशी और सतत विकास की दिशा में
मनरेगा का निरंतर विकसित होता ढांचा सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो समावेशी और सतत ग्रामीण विकास को साकार करने की दिशा में है। यह योजना गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की मजबूत कड़ी साबित हो रही है।
✨ निष्कर्ष
मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की सामाजिक-आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। यह कार्यक्रम ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को भी साधता है।