
ओडिशा की भूमि हाल ही में उस क्षण की साक्षी बनी, जब भारत ने अपनी आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और रणनीतिक दूरदर्शिता का अद्वितीय प्रदर्शन किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में आयोजित यह कार्यक्रम केवल सैन्य शक्ति का परिचय नहीं था, बल्कि यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक था।
🔰 आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र की क्रांति
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों का असर अब स्पष्ट रूप से रक्षा उत्पादन में दिख रहा है। इस आयोजन में प्रदर्शित हथियारों और उपकरणों ने यह साबित किया कि भारत अब केवल खरीदार नहीं, बल्कि एक मजबूत आपूर्तिकर्ता और नवाचार का केंद्र बन चुका है।
- अग्नि एवं पृथ्वी श्रृंखला की मिसाइलों की सटीक मारक क्षमता
- स्वदेशी निगरानी प्रणाली और अत्याधुनिक ड्रोन
- थल, वायु और नौसेना की संयुक्त रणनीतिक कार्यवाही
ये सभी उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि भारत की सुरक्षा नीति अब आत्मनिर्भरता, निर्यात और तकनीकी श्रेष्ठता तीनों को साध रही है।
🛡️ समय पर मिशन पूर्ण करने की क्षमता
राजनाथ सिंह ने सेनाओं की उस दक्षता की सराहना की, जिसके तहत सीमित समय में किसी भी मिशन को सफलता तक पहुँचाने की क्षमता मौजूद है। यह केवल सैन्य तत्परता नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में त्वरित और निर्णायक कदम उठाने की रणनीतिक क्षमता है।
यह योग्यता भारत को सीमावर्ती चुनौतियों, आतंकवाद विरोधी अभियानों और प्राकृतिक आपदाओं के समय और भी अधिक प्रभावी बनाती है।
🌏 विश्व मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
ओडिशा से मिला यह संदेश केवल घरेलू जनता के लिए नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जगत को भी यह बताता है कि भारत अब क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा संरचना में भी विश्वसनीय भागीदार है।
स्वदेशी तकनीक और मजबूत रक्षा प्रणाली के दम पर भारत मित्र देशों को भी सहयोग देने में सक्षम है।
✍️ निष्कर्ष
ओडिशा में हुआ यह रक्षा प्रदर्शन किसी सामान्य अभ्यास से कहीं अधिक था। यह भारत की आत्मनिर्भर तकनीक, वैश्विक दृष्टिकोण और सामरिक शक्ति का संगम था। आज का भारत केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व पटल पर एक जिम्मेदार और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।