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🌍 गाज़ा संकट और शांति की राह: जॉर्डन व फ्रांस का संयुक्त प्रयास


फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में घोषणा की कि जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ घनिष्ठ समन्वय कर आगामी 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी की जा रही है। इस सम्मेलन का उद्देश्य गाज़ा संकट और मध्य-पूर्व में शांति बहाली के लिए ठोस कदम उठाना है।

गाज़ा पुनर्निर्माण पर स्पष्ट रुख

राष्ट्रपति मैक्रों ने साफ किया कि फ्रांस किसी भी ऐसी योजना का विरोध करेगा जिसमें गाज़ा पट्टी के नागरिकों का जबरन विस्थापन हो या क्षेत्र को बाहरी “संरक्षण” या “नियंत्रण” में रखा जाए। उनके अनुसार, यह न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा बल्कि क्षेत्र को स्थायी अस्थिरता की ओर भी धकेलेगा।

सैन्य कार्रवाई की आलोचना

मैक्रों ने इज़राइल की गाज़ा में चल रही जमीनी सैन्य कार्रवाई की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि निरंतर हिंसा और जबरन पलायन की नीति कभी भी स्थायी समाधान नहीं ला सकती, बल्कि इससे अंतहीन संघर्ष ही जन्म लेगा।

शांति की शर्तें

उनके अनुसार, शांति केवल “विराम” से नहीं, बल्कि न्याय और गरिमा पर आधारित समाधान से ही संभव है। इसके लिए स्पष्ट प्राथमिकताएँ निर्धारित की गईं:

भविष्य की दृष्टि

फ्रांस और जॉर्डन इस सम्मेलन को क्षेत्र के लिए “आशा का नया क्षितिज” मानते हैं। मैक्रों ने कहा कि यह प्रयास केवल इज़राइलियों और फ़िलिस्तीनियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की स्थिरता और शांति के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति मैक्रों का संदेश साफ है—हिंसा से शांति जन्म नहीं ले सकती। यदि वास्तविक समाधान चाहिए तो न्याय, मानवता और समान अधिकारों को आधार बनाना होगा। न्यूयॉर्क सम्मेलन से यही उम्मीद है कि यह गाज़ा और पूरे क्षेत्र के लिए शांति और स्थिरता का नया अध्याय खोलेगा।


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