
भारत का स्वतंत्रता दिवस केवल एक तारीख भर नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान, संघर्ष और सपनों का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आज़ादी केवल अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति नहीं थी, बल्कि आत्मनिर्भरता, समानता और न्यायपूर्ण समाज की ओर बढ़ने का अवसर भी थी।
हर वर्ष जब प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हैं, तो उनका संदेश सिर्फ़ अतीत की गाथाओं का स्मरण नहीं होता, बल्कि आने वाले कल की दिशा तय करने का आमंत्रण भी होता है।
🌟 अमृतकाल और सक्रिय नागरिकता
आज हम आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुके हैं। यह वह दौर है, जब केवल सरकार की नीतियाँ ही नहीं, बल्कि नागरिकों की सहभागिता भी निर्णायक बनती है।
- जब हम स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं,
- जब हम पर्यावरण की रक्षा को अपना दायित्व मानते हैं,
- जब हम शिक्षा और तकनीक में नवाचार को बढ़ावा देते हैं,
तो हम सीधे-सीधे राष्ट्रनिर्माण में भागीदार बन जाते हैं।
🤝 सामूहिक संकल्प की शक्ति
भारत की ताक़त उसकी विविधता और एकता में छिपी है। यह स्वतंत्रता दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि –
- जाति, भाषा और धर्म से ऊपर उठकर हम राष्ट्रहित को प्राथमिकता देंगे।
- लोकतंत्र की मज़बूती के लिए संवाद, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को अपनाएँगे।
- युवा शक्ति, विज्ञान, संस्कृति और परंपरा का संतुलित मेल कर एक नए भारत का निर्माण करेंगे।
🚩 निष्कर्ष
79वां स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि नए भारत की परिकल्पना को साकार करने का अवसर है। अब समय है कि हम केवल दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय सहभागी बनें। जब हर नागरिक राष्ट्रहित को अपनी प्राथमिकता बनाएगा, तभी विकसित भारत का सपना हकीकत में बदलेगा।