
भारत और जर्मनी के बीच कूटनीतिक संबंध समय के साथ न केवल मज़बूत हुए हैं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी उनका महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जर्मनी के विदेश मंत्री योहन्न वेडेफुल की बातचीत ने इस संबंध को और गहराई देने का संदेश दिया।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अनिश्चितताओं के दौर में भारत-जर्मनी संबंधों की स्थिरता और भरोसेमंद प्रकृति विशेष महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता “गहराई में बढ़ रहा है और वैश्विक परिदृश्य में इसकी अहमियत और भी अधिक हो गई है।”
स्थिर और पूर्वानुमेय संबंध
भारत और जर्मनी के बीच संबंधों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी निरंतरता और पूर्वानुमेयता है। दोनों देशों द्वारा किए गए वादे और नीतियाँ समय के साथ स्थिर बनी रही हैं। जयशंकर ने इसे “बहुत स्थिर रिश्ता” बताते हुए कहा कि आज की वैश्विक राजनीति में पूर्वानुमेयता का मूल्य बहुत अधिक है।
आपसी भरोसा और सहयोग
जयशंकर ने जर्मन विदेश मंत्री योहन्न वेडेफुल का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि वे अपने नए कार्यकाल में पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ भारत-जर्मनी संबंधों को आगे बढ़ाएँगे। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद बना रहा है, जिससे परस्पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
रक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
द्विपक्षीय बैठक में क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर भी विशेष बल दिया गया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में जर्मनी के समर्थन की सराहना की। जर्मनी ने साफ़ शब्दों में भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, जिसे जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
निष्कर्ष
भारत-जर्मनी संबंध केवल आर्थिक या राजनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझा मूल्यों, विश्वास और स्थिरता पर आधारित हैं। आज की अनिश्चितताओं भरी दुनिया में ऐसे संबंध वैश्विक राजनीति को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले समय में यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।