
प्रयागराज, 3 सितंबर 2025 — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने वाराणसी विशेष सांसद/विधायक (MP/MLA) अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला राहुल गांधी द्वारा अमेरिका में दिए गए कथित बयानों से जुड़ा है।
मामला क्या है?
सितंबर 2024 में अमेरिका की यात्रा के दौरान राहुल गांधी, जो लोकसभा में विपक्ष के नेता भी हैं, ने एक कार्यक्रम में सिख समुदाय से संबंधित टिप्पणी की थी। इसी को लेकर वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शुरुआत में, मिश्रा ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (सदर) अदालत में याचिका दाखिल कर पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, नवंबर 2024 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (MP/MLA कोर्ट) ने इस केस को खारिज कर दिया।
वाराणसी अदालत का आदेश
इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने वाराणसी सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। इस पर विशेष सांसद/विधायक अदालत ने 21 जुलाई 2025 को मिश्रा की याचिका स्वीकार कर ली और मामले को आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
राहुल गांधी की हाईकोर्ट में दलील
राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वाराणसी अदालत का आदेश न केवल गलत और अवैध है, बल्कि अदालत की अधिकार-सीमा (ज्यूरिस्डिक्शन) से भी बाहर है। उनकी मांग थी कि वाराणसी अदालत का आदेश निरस्त किया जाए और जब तक हाईकोर्ट में मामला लंबित है, तब तक उस आदेश पर रोक लगाई जाए।
वर्तमान स्थिति
न्यायमूर्ति समीयर जैन की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत जल्द ही इस पर अपना फैसला सुनाएगी।
निष्कर्ष
यह मामला केवल कानूनी पेचीदगियों का नहीं, बल्कि राजनीतिक महत्व का भी है। विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी की टिप्पणियाँ अक्सर विवाद का विषय बनती रही हैं। अब देखना यह होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट इस याचिका पर क्या निर्णय देता है और इसका राजनीतिक असर किस प्रकार सामने आता है।