
नई दिल्ली, 4 सितंबर 2025 —
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) को लेकर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि जिस योजना को “एक राष्ट्र, एक कर” के नारे के साथ शुरू किया गया था, वह आज “एक राष्ट्र, नौ कर” के रूप में बदल गई है।
जीएसटी का जटिल ढांचा
खड़गे के मुताबिक, मौजूदा समय में जीएसटी के तहत 0%, 5%, 12%, 18% और 28% की कर दरें लागू हैं। इसके अलावा 0.25%, 1.5%, 3% और 6% जैसी विशेष दरें भी मौजूद हैं। इस कारण टैक्स प्रणाली सरल और पारदर्शी होने के बजाय और अधिक उलझी हुई प्रतीत होती है।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस पार्टी लंबे समय से जीएसटी को सरल बनाने की मांग करती रही है। खड़गे ने याद दिलाया कि 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावी घोषणापत्र में कांग्रेस ने “जीएसटी 2.0” की बात की थी, जिसमें एक सरल, न्यायसंगत और तार्किक कर ढांचे का प्रस्ताव रखा गया था। उनका आरोप है कि वर्तमान प्रणाली ने छोटे व्यवसायों और एमएसएमई पर बोझ बढ़ाया है, क्योंकि उन्हें जटिल अनुपालन और कागजी कार्यवाही का सामना करना पड़ता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि जब 2011 में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी विधेयक लाने की कोशिश की थी, तब भाजपा ने इसका विरोध किया था। यहां तक कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्होंने जीएसटी का विरोध किया था। खड़गे का तर्क है कि अब वही भाजपा सरकार जीएसटी को लागू करके इसे “जश्न का विषय” बताती है, जबकि असलियत में यह आम जनता और कारोबारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
आगे की राह
जीएसटी का उद्देश्य पूरे देश में कर व्यवस्था को एकसमान और सरल बनाना था, लेकिन मौजूदा ढांचे ने इस सपने को कमजोर कर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में सरकार वास्तव में “एक राष्ट्र, एक कर” की परिकल्पना को सरल और व्यावहारिक रूप में लागू कर पाएगी या यह नारा केवल चुनावी वादों तक सीमित रह जाएगा।