
मॉस्को, 4 सितंबर 2025 — यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के विमान से जुड़े जीपीएस जैमिंग (सैटेलाइट सिग्नल में व्यवधान) के आरोपों पर रूस ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की बातें “राजनीतिक भ्रम पैदा करने और रूस को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करने की सोची-समझी कोशिश” हैं। मॉस्को ने साफ कहा कि रूस की सैन्य और तकनीकी क्षमताओं को लेकर अक्सर पश्चिमी देशों द्वारा गलत सूचनाएँ फैलाई जाती हैं, जबकि हकीकत इससे काफी अलग है।
यूरोपीय पक्ष के आरोप
हाल ही में यूरोप के कुछ मीडिया संस्थानों और अधिकारियों ने दावा किया था कि वॉन डेर लेयेन के विमान को बाल्टिक क्षेत्र से गुजरते समय नेविगेशन में कठिनाई का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक यह व्यवधान रूस की ओर से जानबूझकर किए गए जीपीएस जैमिंग के कारण हो सकता है।
रूस का पलटवार
रूस ने कहा कि जीपीएस जैसी वैश्विक तकनीक में अस्थायी रुकावटें कई कारणों से हो सकती हैं — जैसे मौसम की स्थिति, तकनीकी गड़बड़ी या अन्य सिग्नल हस्तक्षेप। मॉस्को का तर्क है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के रूस पर उंगली उठाना केवल भूराजनीतिक तनाव को बढ़ाने वाला कदम है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक भू-राजनीति में “सूचना युद्ध” भी एक बड़ा हथियार बन चुका है। आरोप और खंडन की यह प्रक्रिया अक्सर रणनीतिक उद्देश्यों को साधने के लिए इस्तेमाल की जाती है। ऐसे में इस घटना को भी यूरोप-रूस के बीच लंबे समय से जारी तनाव की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
वॉन डेर लेयेन के विमान पर हुए कथित जीपीएस जैमिंग विवाद ने एक बार फिर पश्चिम और रूस के रिश्तों में गहराई से मौजूद अविश्वास को उजागर कर दिया है। रूस का खंडन और यूरोप के आरोप दोनों यह साबित करते हैं कि आधुनिक दौर में तकनीक, सुरक्षा और राजनीति आपस में कितनी गहराई से जुड़ चुकी हैं।