
लखनऊ, 4 सितंबर 2025 —
उत्तर प्रदेश की राजनीति में व्यंग्य कभी पुराना नहीं होता। नेता चाहे सत्ता में हों या विपक्ष में, कटाक्ष के तीर हमेशा तैयार रहते हैं। इस बार निशाना साधा है समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने। उन्होंने बीजेपी की “डबल इंजन सरकार” की तुलना सड़क पर धक्के खाती एक बस से कर डाली।
तस्वीर ने बोला व्यंग्य
सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में पुलिसकर्मी और ट्रैफिक कर्मचारी एक जर्जर बस को धक्का देकर आगे बढ़ाते नज़र आए। अखिलेश यादव ने इसी दृश्य पर तंज कसते हुए लिखा — “डबल इंजन सरकार का यही हाल है, अब बस भी जनता के साथ धक्के खा रही है।”
इस एक पंक्ति ने जैसे सरकार की पूरी ‘ब्रांडिंग’ की हवा निकाल दी।
जनता की तकलीफ बनाम सरकार का प्रचार
प्रदेश में रोडवेज की हालत किसी से छुपी नहीं। बसें अक्सर बीच रास्ते दम तोड़ देती हैं, यात्री घंटों फंसे रहते हैं और कभी-कभी खुद ही बस को धकेलने लगते हैं। सरकार जहां नई बसों और बेहतर परिवहन की बातें करती है, वहीं जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाती है। यही विरोधाभास अब विपक्ष के हाथों में हथियार बन गया है।
बीजेपी का पलटवार
स्वाभाविक है, बीजेपी नेताओं ने भी जवाबी हमला बोला। उनका कहना है कि विपक्ष विकास की असली तस्वीर नहीं देखना चाहता और चुनावी मुद्दे के अभाव में “बसों की तस्वीरों” से राजनीति कर रहा है। मगर जनता का कहना है कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं—अगर बसें धक्के पर चल रही हैं तो सरकार की नीतियों पर सवाल उठना ही स्वाभाविक है।
व्यंग्य का असर
धक्के खाती यह बस अब सिर्फ एक वाहन नहीं रही, बल्कि पूरे सिस्टम की हालत का प्रतीक बन गई है। विपक्ष इसे “फेल डबल इंजन” करार दे रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे “बेबस विपक्ष की रणनीति” बता रहा है।
निष्कर्ष
सड़क पर अटकी बस और सियासत में अटकी बहस—दोनों ही तस्वीरें जनता के सामने हैं। अब देखना यह है कि वोटर किस पर भरोसा करता है—सरकार के चमकदार वादों पर, या उस धक्के खाती बस पर जिसने विकास की पोल खोल दी है।