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📡 मोबाइल टॉवर उपकरण चोरी का खुलासा : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता


दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हाल ही में एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो मोबाइल टॉवर के अत्याधुनिक उपकरणों की चोरी और उन्हें विदेश में तस्करी करने की योजना में सक्रिय था। इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह उपलब्धि न केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की दूरसंचार और साइबर सुरक्षा प्रणाली की मजबूती का भी प्रमाण है।


🔍 तीन महीने की सतर्क जांच, डॉक्टर प्रसून की टीम की मेहनत

इस ऑपरेशन की कमान क्राइम ब्रांच के अधिकारी डॉ. प्रसून के हाथों में थी। करीब तीन महीने तक लगातार निगरानी, तकनीकी ट्रैकिंग और गुप्त सूचनाओं के आदान-प्रदान के बाद पुलिस टीम आरोपियों तक पहुँच सकी। जांच से पता चला कि ये आरोपी हरियाणा के ज़रिए चोरी किए गए Remote Radio Units (RRU) को चीन तक पहुँचाने की फिराक में थे।


📶 RRU क्या है और क्यों अहम है?

RRU यानी Remote Radio Unit मोबाइल टॉवर का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है जो नेटवर्क कवरेज और कॉल क्वालिटी को सुनिश्चित करता है। अगर ये उपकरण चोरी हों, तो न केवल मोबाइल सेवाओं पर असर पड़ता है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। विदेशी बाज़ार में इनकी मांग और अधिक जोखिम पैदा करती है।


🚔 बरामदगी और कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के कब्ज़े से 30 चोरी किए गए RRU बरामद किए हैं, जिनकी कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। इस गिरोह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है, जिनमें चोरी, आपराधिक षड्यंत्र और राष्ट्रीय संपत्ति की तस्करी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।


🌍 अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संकेत

इस मामले में चीन का नाम सामने आना यह दर्शाता है कि तकनीकी उपकरणों की अवैध तस्करी अब सीमाओं से परे एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी है। यह भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए सतर्कता का स्पष्ट संदेश है कि ऐसी गतिविधियों पर सख़्त नज़र रखने की आवश्यकता है।


👮 दिल्ली पुलिस का संदेश

इस सफल कार्रवाई से दिल्ली पुलिस ने यह साबित कर दिया कि तकनीकी और साइबर अपराधों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस की यह उपलब्धि जनता और दूरसंचार क्षेत्र, दोनों के लिए भरोसा जगाने वाली है।


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