
भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और विद्वान डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञान का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण और मानवीय मूल्यों को विकसित करने का माध्यम माना।
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने संदेश में सभी शिक्षकों, शिक्षिकाओं, प्राध्यापकों, अध्यापिकाओं और गैर-शैक्षणिक कर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह रोशनी है, जो समाज के अंधकार को मिटाकर एक नई दिशा प्रदान करती है।
🌸 सम्मान और प्रेरणा का दिन
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न स्कूलों और आईटीआई से जुड़े शिक्षकों को “शिक्षक रत्न” सम्मान से नवाज़ा गया। साथ ही राज्य के उन स्कूलों को भी पुरस्कृत किया गया, जिन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन में विशेष योगदान दिया है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने उन छात्रों और छात्राओं को भी बधाई दी, जिन्होंने राज्य के अलग-अलग बोर्ड और संस्थानों—जैसे माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, जनरल एजुकेशन, मदरसा, ICSE, ISC, CBSE तथा व्यावसायिक (Vocational) परीक्षाओं—में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मेधा सूची (Merit List) में स्थान प्राप्त किया।
✨ शिक्षा का व्यापक महत्व
शिक्षक दिवस केवल औपचारिक उत्सव भर नहीं है, बल्कि यह हमें इस बात की याद दिलाता है कि समाज की प्रगति और राष्ट्र के भविष्य की नींव शिक्षकों की निष्ठा और विद्यार्थियों के परिश्रम पर ही टिकी होती है। शिक्षा के बिना ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता अधूरी है।
🌍 निष्कर्ष
इस अवसर पर हमें अपने गुरुजनों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ यह संकल्प भी लेना चाहिए कि शिक्षा को केवल परीक्षा और अंक तक सीमित न रखकर, जीवन निर्माण और समाज सुधार का साधन बनाएं। तभी सच्चे अर्थों में शिक्षक दिवस का महत्व सार्थक होगा।