
भारत में 5 सितंबर को हर वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक दिवस बड़े सम्मान और आभार के साथ मनाया जाता है। यह दिन केवल शिक्षा के महत्व को रेखांकित करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी माध्यम है, जिन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है।
🌟 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : शिक्षा के प्रकाशस्तंभ
5 सितंबर को यह दिन इसलिए चुना गया क्योंकि यह महान दार्शनिक, शिक्षक और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस है। उन्होंने जीवन भर यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण बनाने का माध्यम है।
उनकी यह सोच थी कि यदि समाज को सशक्त बनाना है तो सबसे पहले शिक्षकों को सम्मान देना और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
📚 शिक्षक : राष्ट्र निर्माता
एक शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, नैतिक मूल्यों और सोच को आकार देता है। बदलते युग में जहाँ तकनीक तेजी से शिक्षा प्रणाली को परिवर्तित कर रही है, वहीं शिक्षक ही वह आधार हैं जो विद्यार्थियों को सही दिशा और जीवन दृष्टि प्रदान करते हैं।
आज के डिजिटल युग में भी शिक्षक की भूमिका कम नहीं हुई है, बल्कि और भी महत्वपूर्ण बन गई है क्योंकि उन्हें विद्यार्थियों को सही और गलत के बीच भेद सिखाना होता है।
🌍 शिक्षक दिवस का सामाजिक संदेश
राष्ट्रीय शिक्षक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि समाज में शिक्षकों की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती। वे आने वाली पीढ़ियों की सोच, संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की नींव रखते हैं।
यही कारण है कि इस दिन हम अपने सभी शिक्षकों को नमन करते हैं और उनके योगदान का उत्सव मनाते हैं।
✒️ निष्कर्ष
राष्ट्रीय शिक्षक दिवस सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि शिक्षा और शिक्षक के महत्व को स्वीकार करने का अवसर है। डॉ. राधाकृष्णन की विरासत हमें यह सिखाती है कि शिक्षा से ही सशक्त समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है।
आज के दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम न केवल अपने शिक्षकों का सम्मान करेंगे, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।