
भारत आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेज़ी से उभरती हुई शक्ति बन रहा है। इसी दिशा में बायोइकोनॉमी (जैव-आर्थिकी) एक ऐसा क्षेत्र है जिसने बीते दशक में उल्लेखनीय प्रगति की है। जहां वर्ष 2014 में इसका मूल्य केवल 10 अरब डॉलर था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 165.7 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। अब सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक इसे 300 अरब डॉलर के स्तर तक पहुँचाया जाए।
🔹 अर्थव्यवस्था में बायोइकोनॉमी का योगदान
- वर्तमान समय में बायोइकोनॉमी का हिस्सा भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 4% तक है।
- यह क्षेत्र न केवल रोजगार सृजन में सहायक है, बल्कि चिकित्सा, कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण जैसे अनेक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
🔹 भारत को वैश्विक बायो-निर्माण केंद्र बनाने का संकल्प
भारत सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है। लक्ष्य है कि भारत को विश्व स्तरीय बायो-निर्माण केंद्र बनाया जाए, जो नवाचार (Innovation), स्थिरता (Sustainability) और समावेशी विकास (Inclusive Development) पर आधारित हो।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- बायोफार्मा और बायोटेक्नोलॉजी उद्योग का विस्तार।
- स्वदेशी अनुसंधान और प्रयोगशालाओं को बढ़ावा।
- हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के साथ नई तकनीक का विकास।
🔹 बायोइकोनॉमी का महत्व
बायोइकोनॉमी सिर्फ आर्थिक लाभ का साधन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण-संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और किसानों की आय में वृद्धि जैसे अनेक क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह भारत को एक सतत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
✨ निष्कर्षतः, बायोइकोनॉमी भारत के लिए सिर्फ एक आर्थिक क्षेत्र नहीं बल्कि 21वीं सदी में विकास और वैश्विक नेतृत्व की कुंजी है। यदि यही रफ्तार बरकरार रही, तो आने वाले वर्षों में भारत इस क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।