
प्राकृतिक आपदाएँ जब जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देती हैं, तब राहत पहुँचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। हाल ही में अमृतसर ग्रामीण क्षेत्र में आई बाढ़ ने यही स्थिति पैदा की। लेकिन इस संकट की घड़ी में पंजाब पुलिस ने आधुनिक तकनीक को मानवीय सेवा से जोड़ते हुए एक नई मिसाल कायम की।
ड्रोन बने उम्मीद की उड़ान
नदी के पानी से कटे गाँव और डूबे हुए रास्तों तक पहुँचना लगभग असंभव हो गया था। नाव और वाहन भी कई जगह बेकार साबित हो रहे थे। ऐसे समय में पुलिस ने अत्याधुनिक ड्रोन का सहारा लिया। इन ड्रोन की मदद से भोजन, दवाइयाँ और ज़रूरी सामान सीधे पीड़ित परिवारों के घरों तक पहुँचाया गया।
राहत कर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित
ड्रोन तकनीक से न सिर्फ पीड़ितों तक तेज़ी से मदद पहुँची, बल्कि राहतकर्मियों को खतरनाक परिस्थितियों में जाने से भी बचाया गया। इस तरह मानव जीवन की सुरक्षा और सहायता, दोनों उद्देश्यों की पूर्ति एक साथ हुई।
पुलिस की बदली छवि
आमतौर पर पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस पहल ने उनकी मानवीय भूमिका को और गहरा कर दिया। पंजाब पुलिस ने यह दिखा दिया कि संकट के समय वे समाज की ढाल बनकर हर मोर्चे पर खड़े हो सकते हैं।
भविष्य का आपदा प्रबंधन मॉडल
यह प्रयोग संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन, जीआईएस मैपिंग और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मिलकर आपदा प्रबंधन का स्वरूप बदल देंगे। अगर केंद्र और राज्य सरकारें इसे बड़े स्तर पर अपनाएँ, तो दुर्गम और जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में भी राहत कार्य आसान और सुरक्षित हो सकेंगे।