
हाल ही में वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने “इज़राइल-हमास युद्ध के बारे में तीन बड़े झूठ” शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसने वैश्विक स्तर पर बहस को जन्म दिया क्योंकि इसमें उन धारणाओं को चुनौती दी गई जो लंबे समय से इस संघर्ष को लेकर लोगों के बीच प्रचलित हैं। आइए जानते हैं वे तीन भ्रांतियाँ और उनके पीछे छिपी वास्तविकताएँ।
1️⃣ झूठ: इज़राइल जानबूझकर गाज़ा के नागरिकों पर हमला करता है
यह आरोप सबसे ज़्यादा फैलाया गया है। दरअसल, हमास एक आतंकी संगठन है जो हमेशा नागरिक आबादी के बीच से अपने हमले करता है। उसके लड़ाके स्कूलों, अस्पतालों और मस्जिदों जैसे संवेदनशील ठिकानों को हथियार रखने और रॉकेट दागने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, हमास ने गाज़ा के नीचे सुरंगों का एक विशाल जाल भी बना रखा है।
जब इज़राइल जवाबी कार्रवाई करता है तो अक्सर नागरिक क्षेत्र प्रभावित होते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार, इज़राइली सेना (IDF) पहले चेतावनी जारी करती है, पर्चे गिराती है और फोन कॉल या संदेशों के ज़रिए नागरिकों को सुरक्षित निकलने का समय देती है। वहीं दूसरी तरफ, हमास निर्दोष लोगों को मानव ढाल की तरह प्रयोग करता है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का घोर उल्लंघन है।
2️⃣ झूठ: गाज़ा की मानवीय स्थिति सिर्फ इज़राइल की नाकेबंदी की वजह से है
यह भी वास्तविकता से परे है। गाज़ा की जनता की दुर्दशा का एक बड़ा कारण हमास का भ्रष्ट शासन और तानाशाही रवैया है। संगठन को जब-जब अंतरराष्ट्रीय मदद मिली, उसने उस संसाधन का इस्तेमाल जनता की भलाई में करने के बजाय हथियार खरीदने और अपने आतंक नेटवर्क को मजबूत करने में किया।
मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयासों में इज़राइल और अन्य देशों की मदद दर्ज की गई है। ट्रकों में भरी राहत सामग्री गाज़ा भेजी गई, लेकिन कई बार हमास ने इन्हें लूट लिया या अपने फायदे के लिए रोक लिया। इस वजह से गाज़ा के आम लोगों तक मदद सही तरीके से नहीं पहुँच पाती।
3️⃣ झूठ: यह संघर्ष केवल ज़मीन पर कब्ज़े की लड़ाई है
यह धारणा भी भ्रामक है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इज़राइल पर अचानक हमला किया, जिसमें 1,200 से ज़्यादा निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई। इनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। साथ ही सैकड़ों लोगों को बंधक बनाकर गाज़ा ले जाया गया।
ऐसे हालात में इज़राइल के पास सिर्फ एक ही विकल्प बचा—अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हमास के खतरे को खत्म करना। इस युद्ध का उद्देश्य भू-भाग पर कब्ज़ा नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा है। इज़राइल साफ कर चुका है कि उसका मकसद हमास को पूरी तरह खत्म करना है ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी न दोहराई जाए।
निष्कर्ष
इन तीनों भ्रांतियों को समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह युद्ध केवल इज़राइल और हमास के बीच का संघर्ष नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और आतंकवाद के बीच टकराव है। सच और झूठ की पहचान करना ही इस जटिल विवाद को सही नज़रिए से देखने की पहली शर्त है।