
कूटनीतिक स्तर पर यूक्रेन लगातार अपनी उपस्थिति और साझेदारी को मज़बूत कर रहा है। हाल ही में सम्पन्न हुए जी-7 संसदीय शिखर सम्मेलन ने इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। इस बैठक में यूक्रेन का प्रतिनिधित्व वेरखोवना राडा (यूक्रेन की संसद) के अध्यक्ष, रुसलान स्टेफанчुक ने किया।
उन्होंने कनाडा, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली की संसदों के सभापतियों के साथ-साथ यूरोपीय संसद के अध्यक्ष से भी संवाद स्थापित किया। यह संवाद केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें वैश्विक चुनौतियों, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत बनाने पर ठोस विचार-विमर्श हुआ।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की ने इस अवसर पर अपने वक्तव्य में यह स्पष्ट किया कि यूक्रेन की कूटनीति हर स्तर पर सक्रिय है। उन्होंने साझेदार देशों को उनके निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और रुसलान स्टेफанчुक की प्रभावी संसदीय कूटनीति की सराहना की।
यह सम्मेलन उस समय हुआ है जब यूक्रेन कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, और ऐसे में जी-7 जैसे वैश्विक मंचों पर उसकी उपस्थिति न केवल राजनीतिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संसदीय स्तर पर हुई इस भागीदारी से यह संदेश गया है कि लोकतांत्रिक राष्ट्र आपसी संवाद और सहयोग के माध्यम से वैश्विक संकटों का समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
🔹 निष्कर्ष
जी-7 संसदीय शिखर सम्मेलन में यूक्रेन की भागीदारी यह दर्शाती है कि विश्व राजनीति में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। कूटनीति के इस स्वरूप ने यह भी साबित किया कि युद्ध और संकट के बीच भी संवाद और सहयोग का पुल टूटना नहीं चाहिए, बल्कि और अधिक मज़बूत होना चाहिए।