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पंजाब में बाढ़ पीड़ितों की मदद को कांग्रेस आगे आई: अमृतसर से भेजी चार ट्रक राहत सामग्री


पंजाब में लगातार बारिश और नदियों के उफान से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, जिससे लोगों का घर-बार, खेती-बाड़ी और रोज़गार सब संकट में आ गया है। ऐसे कठिन समय में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पीड़ितों की मदद के लिए राहत अभियान शुरू किया है।

शनिवार को अमृतसर से कांग्रेस नेताओं ने चार ट्रकों में राहत सामग्री रवाना की। इस सामग्री में ज़रूरी खाद्य पदार्थ, पानी और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल थीं। कार्यक्रम में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, कांग्रेस महासचिव व पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल और अमृतसर से सांसद गुरजीत औजला सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

राजा वड़िंग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह पहल राहुल गांधी की चिंता के बाद शुरू की गई है। उन्होंने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस राहत अभियान में आगे आएं ताकि कोई भी बाढ़ पीड़ित भूखा-प्यासा न रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस मौके पर पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा हालात ने लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, “जब सरकार खुद अस्पतालों में भर्ती हो, तो जनता की देखभाल कौन करेगा?”

इसी बीच कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल ने बताया कि वे पंजाब के छह ज़िलों का दौरा करेंगे, जिनमें फाज़िल्का, गुरदासपुर और अमृतसर शामिल हैं। वे वहां की स्थिति का आकलन कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे और राहुल गांधी को सौंपेंगे।

भूपेश बघेल ने राज्य और केंद्र सरकार दोनों पर बाढ़ प्रबंधन में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से अब तक मौतों, पशुधन के नुकसान या फसल की बर्बादी से जुड़ा कोई ठोस आंकड़ा साझा नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, प्रभावित गांवों तक पर्याप्त राहत सामग्री, स्वच्छ पानी और भोजन भी नहीं पहुंच पाया है।

निष्कर्ष

पंजाब में बाढ़ से उत्पन्न हालात गंभीर हैं और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे समय में कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया यह राहत अभियान पीड़ित परिवारों के लिए राहत की किरण साबित हो सकता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि केवल राजनीतिक दलों की कोशिश काफी नहीं है, बल्कि राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की आपदा का असर कम किया जा सके।


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