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🌐 “स्कूल जाना खतरे से खाली क्यों नहीं?” — संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा पर संकट


तकनीकी विकास और वैश्विक सहयोग के दौर में भी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऐसी सच्चाई झेल रहा है, जहाँ मासूम बच्चों के लिए स्कूल की दहलीज पार करना मौत से खेलने जैसा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक संदेश में यह सवाल उठाया:
“क्या केवल पढ़ाई के लिए किसी बच्चे की जान खतरे में पड़नी चाहिए?”

📖 शिक्षा: मौलिक अधिकार या जंग का शिकार?

शिक्षा हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन युद्धग्रस्त इलाकों में यह अधिकार एक संघर्ष बन गया है।

ये हालात आने वाली पीढ़ियों को अंधकार और निराशा की ओर धकेल रहे हैं।

📊 भयावह आँकड़े

संयुक्त राष्ट्र और यूनिसेफ की ताज़ा रिपोर्टें बताती हैं:

🛡️ समाधान के रास्ते

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद ज़रूरी है:

🇮🇳 भारत की ज़िम्मेदारी

भारत जैसे देश इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं:

🔚 निष्कर्ष

जब कोई बच्चा स्कूल जाने से पहले यह सोचने पर मजबूर हो कि वह सुरक्षित घर लौट पाएगा या नहीं, तो यह पूरी मानवता की विफलता है।
हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा कभी भी संघर्ष का शिकार न बने, बल्कि वह शांति और भविष्य निर्माण का आधार बने।


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