
नई दिल्ली: देश में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। लेकिन शुरुआती समीकरण ही इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत तय मानी जा रही है। विपक्ष ने भले ही अपनी ओर से उम्मीदवार खड़ा किया हो, लेकिन आंकड़े साफ बता रहे हैं कि उनकी राह बेहद मुश्किल है।
NDA के पास मजबूत संख्याबल
लोकसभा और राज्यसभा में एनडीए की स्थिति बेहद मज़बूत है। सूत्रों के अनुसार, राधाकृष्णन को कुल मिलाकर 427 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना है। उपराष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम 391 वोटों की आवश्यकता होती है, जबकि एनडीए इस आंकड़े से काफी आगे दिखाई दे रहा है। लोकसभा से लगभग 293 सांसद और राज्यसभा से 134 सांसद उनके पक्ष में वोट डाल सकते हैं।
इसके अलावा, बीजेडी, बीआरएस और शिरोमणि अकाली दल जैसे कुछ दल मतदान से दूर रहने वाले हैं। यह फैसला अप्रत्यक्ष रूप से एनडीए के उम्मीदवार को ही फायदा देगा।
विपक्ष की कमजोर स्थिति
विपक्ष ने पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। हालांकि, उनके समर्थन में अधिकतम 354 सांसद ही दिखाई दे रहे हैं—लोकसभा से 249 और राज्यसभा से 105। यह संख्या एनडीए के मुकाबले काफी कमज़ोर है और जीत की संभावना लगभग नामुमकिन लग रही है।
भाजपा सांसदों का आत्मविश्वास
भाजपा सांसद अनंत नायक ने स्पष्ट कहा है कि “जब संख्याबल हमारे पक्ष में है, तो जीत भी हमारी ही होगी।” वहीं, प्रदीप पुरोहित ने दावा किया कि एनडीए को 422 से ज्यादा वोट निश्चित रूप से मिलेंगे और कुछ अन्य दलों की क्रॉस-वोटिंग से यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
नतीजों का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का उपराष्ट्रपति चुनाव केवल औपचारिकता भर रह गया है। विपक्ष की चुनौती बेहद कमजोर पड़ चुकी है और परिणाम लगभग तय है। यह तस्वीर एक बार फिर साबित करती है कि संसद में एनडीए की पकड़ विपक्ष की तुलना में कहीं ज्यादा मज़बूत है।