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भ्रष्टाचार पर यूपी पुलिस का कड़ा रुख: ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की ओर कदम


भ्रष्टाचार! यह शब्द सुनते ही हर आम नागरिक के मन में आक्रोश और निराशा दोनों पैदा होती है। यह किसी दीमक की तरह है, जो धीरे-धीरे हमारे समाज और व्यवस्था की नींव को खोखला कर रही है। रिश्वतखोरी और घूसखोरी की यह बीमारी आज़ादी के बाद से लेकर आज तक अलग-अलग रूपों में हमारे सामने आती रही है। कभी छोटी सी फाइल आगे बढ़ाने के लिए नोटों का लेन-देन, तो कभी बड़े ठेकों और अनुबंधों में करोड़ों की घूस—हर स्तर पर इसका जहरीला असर दिखाई देता है।

लेकिन अब उत्तर प्रदेश में हालात बदल रहे हैं। यूपी पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” यानी शून्य सहनशीलता की नीति को लागू किया है। इसका सीधा अर्थ है कि भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

ताज़ा कार्रवाइयाँ बनीं संदेश

हाल ही में दो अहम घटनाओं ने इस नीति की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया।

ये घटनाएँ साबित करती हैं कि अब चाहे अधिकारी बड़ा हो या छोटा, भ्रष्टाचार की आड़ में काम करने वालों के लिए कानून से बच निकलना असंभव होगा।

नागरिकों की भूमिका सबसे अहम

भ्रष्टाचार से लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की ज़िम्मेदारी नहीं है। जब तक आम नागरिक आगे नहीं आएंगे, तब तक इस जड़ जमाए हुए रोग को पूरी तरह मिटाना मुश्किल है। अगर किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा आपसे काम के बदले रिश्वत मांगी जाती है, तो चुप रहने के बजाय रिपोर्ट करना ही सबसे बड़ा योगदान होगा।

यूपी एंटी-करप्शन ऑर्गनाइजेशन ने इसके लिए विशेष व्यवस्था की है।

आपकी एक शिकायत न केवल आपको न्याय दिला सकती है, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी और ईमानदार बनाने की दिशा में कदम भी साबित हो सकती है।

अब वक्त है बदलाव का

भ्रष्टाचार को खत्म करने की यह जंग सिर्फ सरकार या पुलिस की नहीं है। यह हर उस नागरिक की लड़ाई है, जो अपने समाज को बेहतर और साफ-सुथरा देखना चाहता है। अगर हम सब मिलकर आगे आएं, तो यह दीमक हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

याद रखिए, खामोशी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, जबकि आवाज़ उठाना उसे खत्म करने का सबसे बड़ा हथियार है।


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