
वॉशिंगटन डीसी [अमेरिका], 13 सितंबर: अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चीनी नागरिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन पर नई पाबंदियाँ लागू कर दी हैं। अब अमेरिकी वीज़ा पर मौजूद चीनी नागरिक नासा की प्रयोगशालाओं, अनुसंधान कार्यक्रमों और आंतरिक नेटवर्क तक पहुँच नहीं बना पाएंगे। इस फैसले के पीछे मुख्य कारण जासूसी और साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ती आशंकाएँ बताई जा रही हैं।
अचानक रोका गया एक्सेस
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी नागरिक जो ठेकेदार या शोधकर्ता के रूप में नासा से जुड़े हुए थे, उन्हें 5 सितंबर से अचानक परियोजनाओं से हटा दिया गया। कई लोगों को बिना पूर्व सूचना के डिजिटल सिस्टम से बाहर कर दिया गया और न ही वे व्यक्तिगत बैठकें कर पाए और न ही वर्चुअल।
नासा की सफाई
नासा की प्रेस सचिव बेथनी स्टीवंस ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह “आंतरिक सुरक्षा कदम” है, जिसका उद्देश्य शारीरिक और साइबर दोनों प्रकार के जोखिमों को कम करना है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संवेदनशील परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम ज़रूरी था।
अमेरिका में बढ़ती चिंताएँ
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अमेरिकी तकनीकी और अंतरिक्ष संस्थानों में चीनी नागरिकों की गतिविधियों पर लगातार नज़र रखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में चीनी मूल के लोगों से जुड़े कई जासूसी मामलों ने अमेरिकी खुफिया और रक्षा एजेंसियों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
“दूसरी अंतरिक्ष दौड़” की तैयारी
नासा के कार्यकारी प्रशासक शॉन डफी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को “दूसरी स्पेस रेस” का नेतृत्व करना होगा। उनके अनुसार चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम शांति या खोजबीन से अधिक सैन्य उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने चेतावनी दी कि बीजिंग की चंद्रमा संबंधी योजनाएँ अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को और तेज़ कर सकती हैं।
स्पेस फोर्स की चेतावनी
अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रमुख जनरल बी चांस साल्ट्ज़मैन ने पहले ही कहा था कि चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम उसकी सैन्य रणनीति से गहराई से जुड़ा हुआ है। हाल ही में चीन ने अगस्त में लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट का परीक्षण किया है और दशक के अंत तक चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की महत्वाकांक्षा रखता है।
निष्कर्ष
नासा का यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक तनाव का प्रतीक है। जहां अमेरिका अपनी तकनीकी बढ़त और सुरक्षा बनाए रखना चाहता है, वहीं चीन अपनी महत्वाकांक्षाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में यह टकराव वैश्विक अंतरिक्ष राजनीति का केंद्र बन सकता है।