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रूस के तेल पर निर्भरता कम करना क्यों है ज़रूरी: ज़ेलेंस्की का संदेश

यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध ने न केवल पूर्वी यूरोप बल्कि पूरे विश्व की ऊर्जा नीति को प्रभावित किया है। इसी संदर्भ में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि रूस के तेल की खपत को कम करना आवश्यक है, क्योंकि यही रूस की युद्ध छेड़ने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।

ज़ेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब रूस ऊर्जा निर्यात के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रहा है और हथियारों पर खर्च बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि जितने अधिक देश रूस से तेल और गैस खरीदना बंद करेंगे, उतनी ही तेजी से रूस की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी और उसके लिए लंबे समय तक युद्ध जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने अमेरिका की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल आयात को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, और यही रुख अन्य देशों को भी अपनाना चाहिए। ज़ेलेंस्की का यह संदेश विशेष रूप से उन राष्ट्रों के लिए है जो अभी भी रूस से ऊर्जा आयात को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि विकल्प मौजूद हैं।

वैश्विक ऊर्जा संतुलन और चुनौतियाँ

हालाँकि रूस से तेल खरीद कम करने का निर्णय आसान नहीं है। कई यूरोपीय और एशियाई देश दशकों से रूसी तेल और गैस पर निर्भर रहे हैं। ऐसे में अचानक आयात कम करने से घरेलू ऊर्जा संकट, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ सकता है। लेकिन ज़ेलेंस्की का मानना है कि दीर्घकालिक शांति के लिए यह अल्पकालिक चुनौती उठाना आवश्यक है

वैकल्पिक ऊर्जा की ओर रुझान

यह स्थिति उन देशों के लिए भी एक अवसर है जो नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जलविद्युत) या वैकल्पिक स्रोतों पर काम कर रहे हैं। यदि वैश्विक समुदाय इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाता है, तो न केवल रूस पर दबाव बनेगा बल्कि दुनिया को स्थायी ऊर्जा भविष्य भी मिल सकेगा।

निष्कर्ष

ज़ेलेंस्की का संदेश केवल यूक्रेन की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और ऊर्जा स्वतंत्रता से भी जुड़ा हुआ है। रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने का सबसे प्रभावी तरीका उसकी आर्थिक जड़ों यानी तेल और गैस निर्यात को प्रभावित करना है। अब सवाल यह है कि क्या दुनिया इस चुनौतीपूर्ण लेकिन ज़रूरी रास्ते पर कदम बढ़ाने के लिए तैयार है?


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