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गुवाहाटी रिंग रोड: असम की तरक्की का नया अध्याय


असम के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 118.5 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी रिंग रोड की आधारशिला रखी। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल गुवाहाटी शहर की यातायात समस्या का समाधान करेगी, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक प्रगति में भी अहम भूमिका निभाएगी।

परियोजना के मुख्य फायदे

1. यातायात में बड़ी राहत
गुवाहाटी, जिसे उत्तर-पूर्व का प्रवेशद्वार माना जाता है, लंबे समय से भारी जाम की समस्या से जूझ रहा है। नई रिंग रोड राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) पर चलने वाले लंबी दूरी के वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी। इससे शहर के भीतर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम होगा और लोगों की आवाजाही आसान बनेगी।

2. मजबूत क्षेत्रीय संपर्क
यह सड़क सिलिगुड़ी, शिलॉन्ग, जोरहाट, सिलचर, तेजपुर, जोगीघोपा और बारपेटा जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ते हुए यात्रा को तेज और सुगम बनाएगी। इससे लोगों और माल ढुलाई दोनों में समय की बचत होगी तथा व्यापार और उद्योग को नई गति मिलेगी।

3. आर्थिक प्रगति का साधन
कम परिवहन लागत और आसान आवागमन से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। असम को उत्तर-पूर्व के एक बड़े कारोबारी और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में विकसित करने में यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

परियोजना का व्यापक महत्व

गुवाहाटी रिंग रोड सिर्फ एक आधारभूत संरचना नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में दूरगामी सोच का प्रतीक है। यह सरकार की “प्रगति का राजमार्ग” दृष्टि को मजबूत करता है, जिसके तहत देश के हर हिस्से को आधुनिक और सशक्त बुनियादी ढांचे से जोड़ा जा रहा है।

इस रिंग रोड के बनने के बाद बाइहाटा चारियाली से सोनपुर जाने वाले यात्रियों को शहर के बीच से होकर गुजरने की जरूरत नहीं होगी। इससे यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और सड़क सुरक्षा भी बढ़ेगी।

निष्कर्ष

गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना असम और पूरे उत्तर-पूर्व के लिए विकास और समृद्धि की नई राह खोलने वाली है। यह सड़क नेटवर्क न केवल परिवहन को नया रूप देगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। निस्संदेह, यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्र को एक नई आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगी।


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