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रोमानिया के आकाश में रूसी दखल: यूरोप की संप्रभुता पर बढ़ते सवाल


हाल ही में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के एक बयान ने रोमानिया और रूस के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रोमानिया के हवाई क्षेत्र में रूसी प्रवेश न केवल यूरोपीय संघ की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत भी है।

यह घटना केवल रोमानिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के लिए चिंता का कारण बन गई है। यूरोपीय संघ की नींव सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा और एकजुटता पर आधारित है। ऐसे में रूस की यह कार्रवाई उस बुनियादी सिद्धांत को चुनौती देती प्रतीत होती है।

वॉन डेर लेयेन ने यह भी आश्वासन दिया कि रोमानिया की सीमाओं और यूरोपीय संघ के बाहरी इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सदस्य राष्ट्रों के साथ मिलकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि यूरोपीय संघ इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है।

हालांकि, इस घटना पर प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रही हैं। कुछ विशेषज्ञ और नागरिक संघ के सख़्त रुख का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं कि क्या वास्तव में यह दावा पूरी तरह पुष्ट है। एक उपयोगकर्ता ने यह तर्क दिया कि पहले भी पोलैंड के मामले में ऐसे दावे बाद में ग़लत साबित हुए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि संघ की विश्वसनीयता पर भी कुछ हद तक संदेह मौजूद है।

स्थिति का यह स्वरूप बताता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से पूर्वी यूरोप में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। विशेषकर रोमानिया जैसे देश, जो नाटो और यूरोपीय संघ दोनों के सदस्य हैं, उनके लिए इस तरह की घटनाएँ संभावित बड़े टकराव का कारण बन सकती हैं।

अब सभी की निगाहें यूरोपीय संघ की आगामी नीतियों और प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि संघ अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच भरोसे को किस हद तक कायम रख पाता है। आने वाले समय में यही तय करेगा कि यूरोप अपनी सुरक्षा ढाँचे को कितना मज़बूत बना पाता है।


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