
हर साल 15 सितंबर को भारत में राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान अभियंता और भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में समर्पित है। वर्ष 2025 का इंजीनियर्स दिवस विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब भारत “टेकाड” (Techade) की ओर अग्रसर है और इंजीनियरिंग इस परिवर्तन की धुरी बन चुकी है।
इंजीनियर: राष्ट्र निर्माण के असली निर्माता
भारत में बुनियादी ढांचे से लेकर गहरी तकनीकी नवाचारों तक, इंजीनियरों का योगदान हर जगह दिखता है। चाहे वह पुलों और सड़कों का निर्माण हो, स्मार्ट शहरों की योजना हो, स्पेस टेक्नोलॉजी हो या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रगति—भारतीय इंजीनियर अपनी प्रतिभा और मेहनत से देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।
सरकार और अनुसंधान का सहयोग
सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा साझा किए गए संदेश के अनुसार, सरकार निरंतर अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीतियां और संसाधन उपलब्ध करा रही है। इस मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र की मदद से भारतीय इंजीनियर “विकसित भारत 2047” के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सतत और समावेशी विकास
आज का इंजीनियर सिर्फ इमारतें या मशीनें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ऐसे समाधान तैयार कर रहा है जो टिकाऊ (sustainable) और सबको साथ लेकर चलने वाले (inclusive) हों। ग्रीन एनर्जी, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्र इस सोच का प्रतीक हैं।
2025 का संदेश: उत्कृष्टता से आगे बढ़ता भारत
इस वर्ष के राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस का नारा है—“Engineering Excellence Driving India Forward”। यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत के विकास पथ पर इंजीनियरिंग उत्कृष्टता ही वह शक्ति है, जो देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाएगी।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस 2025 हमें यह याद दिलाता है कि हर छोटे से छोटे नवाचार और हर बड़े से बड़े निर्माण के पीछे एक इंजीनियर का समर्पण और परिश्रम छिपा होता है। भारत का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब हम अपने इंजीनियरों को और अधिक अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन देंगे।
भारत का “विकसित भारत 2047” का सपना तभी पूरा होगा जब इंजीनियरिंग को राष्ट्र की धड़कन और नवाचार को उसकी आत्मा माना जाएगा।