
लखनऊ, 15 सितंबर 2025: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर सरकार की भूमिका को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि सरकार को वक्फ मामलों से दूर रहना चाहिए। यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम पर पूर्ण रोक लगाने से इंकार किया, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। यादव ने विश्वास जताया कि न्यायालय आगे चलकर सभी पक्षों को न्याय दिलाएगा।
वक्फ अधिनियम पर रुख
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा, “हमारा मानना है कि सरकार को वक्फ से जुड़े मामलों में दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जो कदम उठाए हैं, उससे हमें भरोसा है कि भविष्य में भी अदालत न्यायसंगत निर्णय देगी।” उन्होंने आगे कहा कि अधिनियम के कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिन्हें विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है।
विश्वकर्मा समुदाय को आश्वासन
अखिलेश यादव ने विश्वकर्मा समुदाय के समर्थन में भी बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो राजधानी के रिवरफ्रंट पर भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक स्थान विकसित किया जाएगा। यादव ने कहा, “हम विश्वकर्मा समाज को यह भरोसा दिलाते हैं कि समाजवादी पार्टी उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा करेगी। 2027 के चुनावों में सामाजिक न्याय के लिए हम सब एकजुट होकर सरकार बनाएंगे।”
विकास और स्वच्छता पर सवाल
यादव ने प्रदेश में विकास और स्वच्छता की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि शहरों को कागजों पर साफ दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि सड़कों पर गंदगी और कचरे के ढेर लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिजली संयंत्र, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी जैसे अहम मुद्दों पर कोई गंभीर बहस नहीं हो रही है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “एक साधु चाहते हैं कि AI, पावर प्लांट, नदियों की सफाई या स्मार्ट सिटी जैसे विषयों पर कोई चर्चा न हो। लेकिन असलियत यह है कि जिन शहरों को स्मार्ट कहा जा रहा है, वहीं सबसे ज्यादा कचरे के ढेर दिखाई देते हैं।”
निष्कर्ष
अखिलेश यादव के ये बयान न केवल वक्फ अधिनियम पर बल्कि प्रदेश की राजनीति और विकास के मुद्दों पर भी नई बहस को जन्म देते हैं। एक ओर वे अल्पसंख्यक और पिछड़े समुदायों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार की उपलब्धियों पर सवाल खड़े कर आगामी चुनावों की दिशा तय करने की कोशिश कर रहे हैं।