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महासागरों की सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर: अवैध मत्स्य पालन रोकने के लिए WTO का ऐतिहासिक समझौता


महासागर न केवल धरती के जलवायु संतुलन को बनाए रखते हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार भी हैं। परंतु लंबे समय से अवैध और अनियंत्रित मत्स्य पालन ने समुद्री जैव-विविधता को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाल ही में लागू हुआ यह समझौता उन सब्सिडियों पर प्रतिबंध लगाता है जो अवैध मत्स्य गतिविधियों को बढ़ावा देती थीं।

112 देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता

इस समझौते को लागू करने के साथ ही दुनिया के 112 देशों ने मिलकर यह संदेश दिया है कि समुद्रों की रक्षा के लिए ठोस और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। अब सरकारें उन वित्तीय सहायताओं को बंद करेंगी, जिनका उपयोग अवैध, गैर-रिपोर्टेड और अनियंत्रित (IUU) मछली पकड़ने के लिए किया जाता रहा है। इससे बड़े वाणिज्यिक जहाजों को अनुचित लाभ नहीं मिलेगा और समुद्री संसाधनों पर दबाव घटेगा।

फ्रांस की अग्रणी भूमिका

इस समझौते को आगे बढ़ाने में फ्रांस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने स्पष्ट किया कि महासागरों की सुरक्षा केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरी मानवता का कर्तव्य है। यह पहल पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन में की गई प्रतिज्ञा का परिणाम है, जिसे अब धरातल पर उतारा गया है। WTO की महानिदेशक न्गोज़ी ओकोंजो-इवेला ने भी इस प्रक्रिया को सफल बनाने में अहम योगदान दिया।

संभावित लाभ

  1. समुद्री पारिस्थितिकी का संरक्षण – अवैध मत्स्य पालन कम होने से मछलियों की प्रजातियों को पुनर्जीवित होने का अवसर मिलेगा। इससे जैव-विविधता और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।
  2. स्थानीय मछुआरों के लिए अवसर – जब बड़े जहाज बिना सब्सिडी के काम करेंगे, तो छोटे मछुआरों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा।
  3. सतत विकास की दिशा में कदम – यह समझौता देशों को जिम्मेदार और टिकाऊ मत्स्य पालन की ओर प्रेरित करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी पर्याप्त समुद्री संसाधन उपलब्ध रहेंगे।

निष्कर्ष

WTO का यह समझौता साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हम पर्यावरणीय संकटों का समाधान निकाल सकते हैं। यह केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि पारिस्थितिकीय संतुलन और सामाजिक न्याय की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से दुनिया को एक संदेश मिलता है—यदि सभी देश मिलकर कार्य करें तो महासागरों की रक्षा करना और भविष्य के लिए उन्हें सुरक्षित रखना संभव है।


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